
Muzaffarpur: मुजफ्फरपुर समेत तिरहुत प्रमंडल के अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है! प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने पर प्रशासन ने अब सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल ने साफ कहा है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता उनकी प्राथमिकता है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। कमिश्नर ने अभिभावकों से अपील की है कि अगर कोई स्कूल बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2019 का उल्लंघन करता है, या किसी प्रकार की अनियमितता करता है तो इसकी शिकायत संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) से करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन का सख्त रुख और निर्देश
प्रमंडलीय आयुक्त ने बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2019 के प्रावधानों का हवाला देते हुए सभी निजी विद्यालयों को कई महत्वपूर्ण निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों और विद्यार्थियों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत दिलाना है। इस दिशा में निजी स्कूल प्रबंधन को निम्नलिखित बातों का पालन करना होगा:
- सभी प्रकार के शुल्कों का पूरा विवरण विद्यालय के सूचना पट्ट और वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
- विद्यालय मनमाने ढंग से शुल्क वृद्धि नहीं करेंगे। यदि शुल्क बढ़ाना आवश्यक हो, तो निर्धारित सीमा और प्रक्रिया का पालन करना होगा।
- री-नामांकन शुल्क और अन्य प्रतिबंधित शुल्क वसूलने पर रोक रहेगी।
- पुस्तकों, पठन-पाठन सामग्री और अन्य आवश्यक सामग्रियों की सूची विद्यालय को सूचना पट्ट और वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी।
- अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान या विक्रेता से पुस्तक, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीद सकेंगे। विद्यालय किसी विशेष दुकान या ब्रांड से खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा और न ही बार-बार पाठ्यपुस्तकों एवं यूनिफॉर्म का पैटर्न बदलेंगे।
- छात्रों एवं अभिभावकों पर अतिरिक्त अध्ययन सामग्री खरीदने का अनावश्यक दबाव नहीं बनाया जाएगा।
- शुल्क बकाया रहने की स्थिति में भी किसी छात्र-छात्रा को कक्षा, परीक्षा या परिणाम से वंचित नहीं किया जाएगा।
मनमानी करने वाले स्कूलों पर गिरेगी गाज
प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल ने शनिवार को पश्चिम चंपारण जिले के 72 निजी स्कूलों की सुनवाई की। इस दौरान पांच स्कूलों की मनमानी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उनके खिलाफ एक लाख रुपये तक के आर्थिक दंड की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया। सुनवाई में उन स्कूलों के प्राचार्य और प्रबंधन को बुलाया गया था, जिन्होंने निर्धारित सीमा (7 प्रतिशत से अधिक) से अधिक फीस बढ़ोतरी की थी। हालांकि, पांच स्कूलों के प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए और न ही प्रशासन की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब दिया। यह कार्रवाई निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए की जा रही है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जिन स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी है, उनमें संत करेंस एकेडमी, संत थामस स्कूल, सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल और होली मिशन स्कूल समेत पांच संस्थान शामिल हैं। इन स्कूलों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि इसके बाद भी बढ़ी हुई फीस वापस नहीं ली गई तो दंड राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पूर्वी चंपारण के 57 स्कूलों पर भी सुनवाई
अब प्रशासन की नजर पूर्वी चंपारण जिले पर है। सोमवार को वहां के 57 निजी स्कूलों के प्राचार्य और प्रबंधकों को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। पूर्वी चंपारण में अब तक 465 स्कूलों में से 202 की जांच की जा चुकी है, जिनमें 57 स्कूलों में फीस वृद्धि से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। इन सभी पर भी सख्त कार्रवाई की तैयारी है। स्कूल फीस वृद्धि को रोकने के लिए प्रशासन कटिबद्ध है।







