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फ़रवरी, 19, 2026
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Muzaffarpur की ‘दूध क्रांति’: घर-घर से निकलीं महिलाएं, 13 करोड़ का कारोबार खड़ा कर दिया

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मुजफ्फरपुर न्यूज़: जिस बिहार को अक्सर पिछड़ेपन के तानों का सामना करना पड़ता है, उसी की धरती से एक ऐसी खबर आई है जो बड़े-बड़े कॉर्पोरेट को भी हैरान कर दे. मुजफ्फरपुर की महिलाओं ने दूध के कारोबार में वो कर दिखाया है, जो अपने आप में एक मिसाल है. घर की देहरी लांघकर इन महिलाओं ने एक ऐसी श्वेत क्रांति को जन्म दिया है, जिसका सालाना टर्नओवर 13 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है.

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यह कहानी सिर्फ दूध उत्पादन के आंकड़ों की नहीं, बल्कि उस मौन क्रांति की है जो गांवों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बना रही है. यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि अगर सही अवसर मिले तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा सकती हैं.

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बिहार के दूध उत्पादन में Muzaffarpur का दबदबा

हाल ही में बाजार और अनुसंधान पर काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की रिपोर्ट ने बिहार के दूध उत्पादन को लेकर बड़े आंकड़े पेश किए. इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में बिहार ने दूध उत्पादन में 60 लाख टन (6 मिलियन टन) का विशाल आंकड़ा पार कर लिया है. यह राज्य की अर्थव्यवस्था और डेयरी सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

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इस बड़ी सफलता में मुजफ्फरपुर जिले का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कुल दूध उत्पादन में अकेले मुजफ्फरपुर जिले की हिस्सेदारी 8 से 10 फीसदी है. यह आंकड़ा दिखाता है कि यह जिला बिहार में श्वेत क्रांति का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है.

महिलाओं के हाथ में ‘श्वेत क्रांति’ की कमान

इस पूरी सफलता की कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि इसकी बागडोर महिलाओं के हाथ में है. जिले में चल रहे महिला स्वयं-सहायता समूहों और सहकारी समितियों ने दूध संग्रह और बिक्री को एक संगठित आंदोलन का रूप दे दिया है. इन महिलाओं के सामूहिक प्रयास का ही नतीजा है कि आज उनका वार्षिक कारोबार 13 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर गया है.

पहले जो महिलाएं केवल घर के काम-काज तक सीमित थीं, आज वे डेयरी कारोबार की बारीकियां समझ रही हैं, आर्थिक फैसले ले रही हैं और अपने परिवार के जीवन स्तर को बेहतर बना रही हैं. यह केवल एक व्यापारिक सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल है.

आत्मनिर्भरता की बनीं मिसाल

मुजफ्फरपुर की इन महिलाओं की सफलता कई मायनों में खास है. इसने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि समाज में उनकी भूमिका और सम्मान को भी बढ़ाया है. यह मॉडल साबित करता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महिलाओं की भागीदारी कितनी अहम हो सकती है.

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संक्षेप में, मुजफ्फरपुर की यह ‘श्वेत क्रांति’ सिर्फ दूध के बढ़ते उत्पादन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह महिला शक्ति, दृढ़ संकल्प और आत्मनिर्भर भारत की सच्ची तस्वीर पेश करती है. यह सफलता प्रदेश की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है.

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