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फ़रवरी, 18, 2026
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अभिभावकों ने परखी बच्चों की पढ़ाई की रफ्तार, एमआईटी में दिखा शिक्षा का नया सवेरा

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मुजफ्फरपुर: क्या आपके बच्चे भी कॉलेजों में जाकर सिर्फ मौज-मस्ती कर रहे हैं या वाकई पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं? यह सवाल हर अभिभावक के मन में उठता है। हाल ही में मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में कुछ ऐसा हुआ, जिसने इस चिंता को दूर करने का एक नायाब रास्ता दिखाया। जानना चाहते हैं क्या हुआ?

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हर माता-पिता की यह स्वाभाविक इच्छा होती है कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर एक उज्ज्वल भविष्य बनाए। लेकिन, कई बार दूर रहकर पढ़ रहे बच्चों की प्रगति को लेकर अभिभावकों में दुविधा बनी रहती है। इसी दुविधा को दूर करने और शिक्षा के स्तर को समझने के लिए मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) ने एक महत्वपूर्ण पहल की। संस्थान में हाल ही में आयोजित एक विशेष सत्र में अभिभावकों को अपने बच्चों की शैक्षणिक प्रगति जानने का अवसर मिला। इस दौरान, वे न केवल अपने वार्ड की कक्षाओं में उपस्थिति, परीक्षा प्रदर्शन और व्यवहार के बारे में जान सके, बल्कि सीधे शिक्षकों और प्राध्यापकों से बातचीत भी कर पाए। यह एक ऐसा मंच था जहां शिक्षा की पारदर्शिता और जवाबदेही को बल मिला।

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शैक्षणिक प्रदर्शन का मूल्यांकन

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को उनके बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना था। कॉलेज के संकाय सदस्यों ने प्रत्येक छात्र की प्रगति रिपोर्ट, असाइनमेंट के अंक और उनकी समग्र शैक्षणिक स्थिति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। अभिभावकों को यह जानकर संतोष हुआ कि उनके बच्चे न केवल पढ़ाई कर रहे हैं, बल्कि किन क्षेत्रों में उन्हें और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, यह भी स्पष्ट हुआ। बातचीत के दौरान, अभिभावकों ने शिक्षकों से कई सवाल पूछे, जिनमें पाठ्यक्रम की जटिलताएं, अतिरिक्त पाठ्येतर गतिविधियों में भागीदारी और करियर मार्गदर्शन जैसे विषय शामिल थे। शिक्षकों ने धैर्यपूर्वक सभी शंकाओं का समाधान किया और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

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अभिभावक-शिक्षक संवाद का महत्व

एमआईटी में आयोजित इस प्रकार का संवाद शिक्षा प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह न केवल छात्रों और शिक्षकों के बीच एक मजबूत सेतु बनाता है, बल्कि अभिभावकों को भी कॉलेज के माहौल और शैक्षणिक लक्ष्यों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। ऐसे आयोजनों से छात्रों में भी जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि उनके माता-पिता उनकी प्रगति पर नजर रख रहे हैं। कई अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए। उनका मानना था कि प्रत्यक्ष बातचीत से उन्हें अपने बच्चों की चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से जानने का मौका मिलता है, जिससे वे घर पर भी उन्हें सही दिशा दे सकते हैं।

उज्ज्वल भविष्य की ओर एक कदम

एमआईटी की यह पहल दर्शाती है कि संस्थान न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि छात्रों के भविष्य को लेकर अभिभावकों की चिंताओं को भी समझता है। ऐसे प्रयासों से न केवल छात्रों का शैक्षणिक प्रदर्शन सुधरता है, बल्कि कॉलेज और अभिभावकों के बीच विश्वास का रिश्ता भी मजबूत होता है, जो अंततः एक सशक्त शैक्षिक वातावरण का निर्माण करता है।

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