

मुजफ्फरपुर न्यूज़: क्या आपके बच्चे भी पढ़ाई के नाम पर सिर्फ वक्त काट रहे हैं? या फिर वाकई वे अपने भविष्य को संवारने में लगे हैं? इसी बड़े सवाल का जवाब तलाशने के लिए मुजफ्फरपुर के एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में अभिभावकों का जमावड़ा लगा, जहां उन्होंने अपने बच्चों की शैक्षिक हकीकत से पर्दा उठाया।
मुजफ्फरपुर स्थित एमआईटी (मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) में हाल ही में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने हिस्सा लिया, जिनका मुख्य उद्देश्य अपने बच्चों की अकादमिक प्रगति और संस्थान में उनके प्रदर्शन का सीधा आकलन करना था। यह कार्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, ताकि छात्रों के विकास को समग्र रूप से समझा जा सके।
संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि ऐसे आयोजन नियमित अंतराल पर किए जाते हैं। इन सत्रों के माध्यम से अभिभावक न केवल अपने बच्चों की परीक्षा परिणामों और उपस्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, बल्कि उन्हें छात्रों की गतिविधियों, व्यवहार और सीखने की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों को समझने का भी अवसर मिलता है। शिक्षकों ने प्रत्येक छात्र के प्रदर्शन पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और अभिभावकों के सवालों के जवाब दिए।
अभिभावकों ने की शिक्षकों से सीधी बात
इस दौरान अभिभावकों ने शिक्षकों से एक-एक कर मुलाकात की और अपने बच्चों की कमजोरियों तथा शक्तियों पर विस्तार से चर्चा की। कई माता-पिता ने बताया कि उन्हें इस संवाद से काफी मदद मिली है, क्योंकि इससे उन्हें घर पर बच्चों की पढ़ाई में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने की दिशा मिली। शिक्षकों ने भी अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने और उनकी रुचि बढ़ाने के विभिन्न तरीकों के बारे में सुझाव दिए।
चर्चा के मुख्य बिंदु:
- छात्रों की उपस्थिति और नियमितता
- अकादमिक प्रदर्शन और परीक्षा परिणाम
- कक्षा में भागीदारी और सीखने की क्षमता
- व्यक्तिगत विकास और व्यवहार संबंधी पहलू
- भविष्य की योजनाएं और करियर मार्गदर्शन
छात्रों के समग्र विकास पर जोर
संस्थान प्रबंधन का कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि छात्रों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। इसके लिए शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाता है। अभिभावकों के साथ इस तरह का तालमेल छात्रों को एक बेहतर शैक्षिक वातावरण प्रदान करने में सहायक होता है।
इस पहल से अभिभावकों में भी संतुष्टि का भाव देखा गया। उनका मानना था कि इस तरह के पारदर्शी संवाद से शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही बढ़ती है और बच्चों के भविष्य को बेहतर दिशा मिल पाती है। कई अभिभावकों ने संस्थान की इस पहल की सराहना करते हुए इसे अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक मिसाल बताया।

