

Patna NEET student death: शिक्षा के शहर पटना में अब बेटियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान उठ रहे हैं। सपनों को पंख देने आई एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। यह याचिका मुजफ्फरपुर जिले के मानवाधिकार मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता एसके झा ने दर्ज कराई है। यह महत्वपूर्ण खबर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जहानाबाद जिले की निवासी गायत्री कुमारी पटना के मुन्नाचक, कंकड़बाग स्थित शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। उसकी मौत के बाद प्रारंभिक जांच में पुलिस ने घटना को आत्महत्या से जोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए। रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला गंभीर आपराधिक कृत्यों से जुड़ा हुआ है।
Patna NEET student death: जांच की दिशा पर गंभीर सवाल
मामले के संबंध में मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा ने बताया कि छात्रा के शरीर पर चोटों के निशान और अन्य परिस्थितियां यह सवाल खड़े करती हैं कि शुरुआत में इस आपराधिक घटना को दबाने का प्रयास किया गया और इसे जानबूझकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। इस प्रकार के जघन्य मामले में जांच में कहीं भी लापरवाही या सच्चाई को छुपाने का प्रयास, जिस स्तर से भी हुआ है, वह एक दंडनीय अपराध है। अधिवक्ता एसके झा ने इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
अधिवक्ता झा ने जोर देकर कहा कि एक सभ्य समाज में बेटियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि जांच में कोई भी चूक या तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया है, तो यह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मानवाधिकार आयोग के स्तर से अवकाश-प्राप्त न्यायाधीश की निगरानी में मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बेटियों की सुरक्षा और न्यायिक हस्तक्षेप की पहल
इस गंभीर मुद्दे पर अधिवक्ता झा ने सुप्रीम कोर्ट और पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। उनकी इस पहल से उम्मीद जगी है कि इस मामले में सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिल पाएगी। यह एक ऐसा कदम है जिससे न्याय प्रणाली में आम जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

