
प्राइवेट स्कूल फीस: अभिभावकों की जेब काटने वाले निजी स्कूलों की मनमानी अब और नहीं चलेगी। तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त ने फीस निर्धारण से लेकर किताब-यूनिफॉर्म की खरीद तक, हर मामले में सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी नकेल कसने की तैयारी में है।
तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने निजी विद्यालयों में मनमानी शुल्क वसूली पर लगाम लगाने के लिए सभी डीएम, डीईओ और क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019 को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया है। आयुक्त ने साफ कहा कि प्री-प्राइमरी से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के सभी निजी विद्यालयों को शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनानी होगी। हालांकि, सरकारी और अनुदानित विद्यालय इस दायरे से बाहर रहेंगे।
प्राइवेट स्कूल फीस वृद्धि और पारदर्शिता के नियम
प्रत्येक विद्यालय को प्रवेश शुल्क, पुनर्नामांकन, विकास, मासिक व वार्षिक शुल्क सहित किताब, यूनिफॉर्म व अन्य मदों का पूरा ब्योरा अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी स्कूल सालाना फीस में अधिकतम 7 प्रतिशत तक ही वृद्धि कर सकेगा। इससे अधिक फीस बढ़ाने के लिए उन्हें शुल्क विनियमन समिति से अनिवार्य रूप से अनुमति लेनी होगी। फीस वृद्धि का प्रस्ताव सत्र शुरू होने से कम से कम तीन माह पहले समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इस समिति में अधिकारी, स्कूल प्रतिनिधि और अभिभावक शामिल होंगे, जो प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
किताब-यूनिफॉर्म पर दबाव नहीं, कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
आयुक्त ने सख्ती से कहा है कि स्कूल किसी खास दुकान से किताब-यूनिफॉर्म खरीदने के लिए अभिभावकों पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बना सकते। यदि ऐसा होता है, तो उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीईओ को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के स्कूलों में फीस वृद्धि की नियमित जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि वृद्धि तय सीमा (7 प्रतिशत) के भीतर ही हो। यदि कोई स्कूल 7 प्रतिशत से अधिक प्राइवेट स्कूल फीस बढ़ाता है या इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर जुर्माना, मान्यता रद्द करने सहित अन्य कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत निवारण तंत्र और नियमित निगरानी
जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करें और एक कंट्रोल रूम बनाएं, ताकि अभिभावकों की शिकायतों का त्वरित और सुनिश्चित निपटारा हो सके। अधिकारियों को नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने और शुल्क संरचना, रसीद व्यवस्था तथा सार्वजनिक जानकारी का सत्यापन करने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांच टीम भी गठित की जाएगी। सभी डीईओ को अपने-अपने जिलों की विस्तृत रिपोर्ट 15 अप्रैल 2026 की शाम 4 बजे तक आयुक्त कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया है। आयुक्त ने इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी को बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है और इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







