

मुजफ्फरपुर न्यूज़: नगर निगम की एक महत्वपूर्ण बैठक में उस वक्त हंगामा मच गया, जब एक अधिकारी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की बात उठी। मामला इतना गर्माया कि बैठक को बीच में ही रोकना पड़ा और निंदा प्रस्ताव पर भी रोक लग गई। आखिर क्या था पूरा माजरा और क्यों नहीं पास हो सका यह प्रस्ताव?
बिहार के मुजफ्फरपुर नगर निगम में आयोजित एक बैठक के दौरान उस समय गहमागहमी बढ़ गई, जब निगम के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव लाने का मुद्दा उठा। बैठक में पार्षदों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके परिणामस्वरूप यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका और इसे बीच में ही रोकना पड़ा। इस घटना के बाद, मामले को शांत करने और स्थिति को संभालने के उद्देश्य से बैठक को अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया गया।
क्या था निंदा प्रस्ताव का कारण?
जानकारी के अनुसार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की कार्यप्रणाली और कुछ निर्णयों को लेकर पार्षदों में लंबे समय से असंतोष व्याप्त था। बैठक में पार्षदों ने उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाए कि उनके फैसलों से निगम के कार्यों में बाधा आ रही है। इसी असंतोष के चलते कुछ पार्षदों ने एकजुट होकर उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने का मन बनाया था, ताकि अधिकारी पर दबाव बनाया जा सके और उनकी जवाबदेही तय हो सके।
बैठक में कैसे गर्माया माहौल?
बैठक शुरू होते ही निंदा प्रस्ताव का मुद्दा उठते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। एक ओर जहां प्रस्ताव का समर्थन करने वाले पार्षद अपनी बातों पर अड़े थे, वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारियों और अन्य पार्षदों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। यह गरमागरमी इतनी बढ़ गई कि सदन में शोर-शराबा होने लगा और शांति व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख, अधिकारियों ने बैठक को रोककर मामले को शांत करने का प्रयास किया।
तमाम हंगामे के बीच, निंदा प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। इसे मतदान के लिए आगे बढ़ाने से पहले ही रोक दिया गया। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण पर विचार-विमर्श करने और एक सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। फिलहाल, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के खिलाफ लाया गया यह निंदा प्रस्ताव लंबित है और अगली रणनीति पर विचार किया जा रहा है।


