

नवादा न्यूज़: विकास की दौड़ में जब जमीन और जीवन आमने-सामने आ जाएं, तो संघर्ष की चिंगारी भड़कना स्वाभाविक है। शुक्रवार को नवादा के चैनपुरा गांव में कुछ ऐसा ही हुआ, जब अडानी ग्रुप की एक परियोजना के लिए बिजली के खंभे गाड़ने पहुंचे, तो पूरा गांव आक्रोश में धधक उठा।
अडानी ग्रुप की परियोजना: बिजली पोल लगाने को लेकर नवादा में ग्रामीणों का हिंसक विरोध!
नवादा: चैनपुरा में क्यों भड़का ग्रामीणों का गुस्सा?
नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के चैनपुरा गांव में शुक्रवार को उस वक्त तनाव गहरा गया, जब विकास और व्यक्तिगत जमीन के मालिकाना हक का विवाद हिंसक रूप ले बैठा। अडानी ग्रुप की एक सहायक कंपनी, अंबुजा सीमेंट की निर्माणाधीन सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट को बिजली मुहैया कराने के लिए 133 केवी हाई वोल्टेज लाइन के पोल और टावर लगाने का काम शुरू होते ही पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। स्थिति इतनी विस्फोटक हो गई कि देखते ही देखते शांत चैनपुरा गांव एक रणभूमि में तब्दील हो गया।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि यह उच्च वोल्टेज बिजली लाइन उनके गांव के पश्चिमी छोर से जबरन निकाली जा रही है। यह वह क्षेत्र है जहां उनकी निजी, बहुमूल्य और पुश्तैनी आवासीय तथा कृषि योग्य भूमि स्थित है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ग्रामीणों का कहना है कि अंबुजा सीमेंट परियोजना के लिए बिना उनकी पूर्ण सहमति और उचित मुआवजे के खंभे गाड़ने से उनका धैर्य जवाब दे गया। उनका तर्क है कि एक बार हाई वोल्टेज तार गुजरने के बाद उनकी जमीन न तो रहने लायक बचेगी और न ही उसका उचित बाजार मूल्य मिलेगा। यह सीधे तौर पर उनकी आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला है।
इसी तीव्र आक्रोश के साथ, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी शामिल थे—घटनास्थल पर जमा हो गए और तत्काल काम रोकने की मांग करने लगे। देखते ही देखते नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए निर्ममता से लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई में ग्रामीणों के अनुसार एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें कई महिलाएं और युवा भी शामिल हैं। पुलिस की लाठियों की मार ने पूरे गांव में भय और गहरे गुस्से का माहौल पैदा कर दिया।
पुलिस कार्रवाई और ग्रामीणों का दावा
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण अपनी ज़मीन और भविष्य को लेकर चिंतित हैं और वे तब तक काम शुरू नहीं होने देने पर अड़े हैं, जब तक उन्हें उचित मुआवजा और सुरक्षा का आश्वासन नहीं मिल जाता। उनका स्पष्ट कहना है कि विकास के नाम पर उन्हें अपनी पुश्तैनी संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्थानीय प्रशासन और अडानी ग्रुप के प्रतिनिधियों को इस मामले में जल्द से जल्द समाधान निकालना होगा ताकि ग्रामीणों के हितों की रक्षा हो सके और परियोजना भी आगे बढ़ सके। यह देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।


