

नवादा हादसा: जहां तिरंगा लहराया, उम्मीदों के दीप जले, वहीं एक पल में खुशियां राख में बदल गईं। गणतंत्र दिवस के उल्लास को तब ग्रहण लग गया, जब एक स्कूल की झांकी में लापरवाही की आग ने मासूमों को अपनी चपेट में ले लिया।
नवादा हादसा: गणतंत्र दिवस की झांकी बनी बच्चों के लिए काल
नवादा जिले के वारिसलीगंज नगर परिषद क्षेत्र में गणतंत्र दिवस का जश्न उस वक्त मातम में बदल गया, जब एक स्कूल द्वारा निकाली गई झांकी के दौरान भीषण अग्निकांड हो गया। इस हादसे में पांच बच्चे बुरी तरह झुलस गए, जिनमें से एक की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद सब्जी बाजार चौक पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झांकी में प्रदर्शन के लिए पेट्रोल का उपयोग किया जा रहा था, और इसी दौरान हुई एक बड़ी चूक ने इस भयावह त्रासदी को जन्म दिया। इस स्कूल की लापरवाही साफ तौर पर दिखाई देती है, जिसने बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रख दिया।
झुलसे बच्चों में से एक बच्ची को बेहतर इलाज के लिए पावापुरी स्थित विम्स रेफर किया गया है, जबकि दो अन्य बच्चों का उपचार वारिसलीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जारी है।
हादसे के बाद स्कूल प्रबंधन की संवेदनहीनता
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने झुलसे बच्चों को अस्पताल पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं की। आसपास मौजूद लोगों ने ही अपनी जिम्मेदारी समझते हुए बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। यह स्कूल की लापरवाही का एक और उदाहरण है, जिसने बच्चों के अभिभावकों को आक्रोशित कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बच्चों के स्वजन अब सीसीटीवी फुटेज खंगालकर दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जिला पदाधिकारी (डीएम) और जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस पूरे मामले की गहन जांच कर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
कड़े कदम उठाने की मांग
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ऐसी घटना का होना बेहद दुखद है। इससे न केवल बच्चों के भविष्य पर सवाल उठता है, बल्कि सुरक्षा मानकों के प्रति उदासीनता भी उजागर होती है। स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा है कि वे इस गंभीर मामले में तत्परता से कार्रवाई करें और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े नियम लागू करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


