पटना न्यूज़: आधी रात अभी पूरी तरह बीती भी नहीं थी कि बिहार के मुखिया अचानक सड़कों पर थे। कौन कहता है कि उम्र ढल चुकी है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुबह-सुबह कई सरकारी विभागों का औचक निरीक्षण कर न सिर्फ अधिकारियों को चौंका दिया, बल्कि अपने आलोचकों को भी करारा जवाब दिया है।
सुबह का समय, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में होते हैं या दिन की शुरुआत की तैयारी कर रहे होते हैं, तब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने काफिले के साथ राजधानी पटना की सड़कों पर निकले। उनका यह औचक दौरा किसी पूर्व सूचना के बिना था, जिसने संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अचानक हड़कंप मचा दिया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान विभिन्न सरकारी कार्यालयों और उनकी कार्यप्रणाली का जायजा लिया।
उनका मुख्य जोर विभागों की साफ-सफाई, कर्मचारियों की उपस्थिति और चल रहे कार्यों की प्रगति पर था। सुबह-सुबह हुए इस निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी कामकाज तय समय पर और कुशलता से हो रहा है, और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। कई स्थानों पर, मुख्यमंत्री को अप्रत्याशित रूप से देख अधिकारी और कर्मचारी सकते में आ गए, और उन्हें तुरंत हरकत में आना पड़ा।
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अल सुबह दौरा, अधिकारियों में हड़कंप
यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस तरह का औचक निरीक्षण किया हो। अपनी कार्यप्रणाली के लिए जाने जाने वाले नीतीश कुमार पहले भी कई बार सुबह-सुबह या देर रात विभागों का जायजा लेते रहे हैं। हालांकि, हालिया कुछ समय से उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। ऐसे में उनका यह सुबह-सुबह का दौरा उन सभी अटकलों पर विराम लगाने वाला साबित हुआ।
निरीक्षण के दौरान, मुख्यमंत्री ने कुछ अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके इस कदम को सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
निरीक्षण का उद्देश्य और संदेश
इस औचक निरीक्षण के पीछे मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि वह राज्य के विकास और सुशासन के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं, और उनकी निगरानी हर स्तर पर बनी रहेगी। यह दौरा न केवल अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सचेत रहने का संकेत देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मुख्यमंत्री स्वयं जमीनी स्तर पर चीजों को समझना और सुधारना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री के इस ऊर्जावान कदम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सक्रियता और समर्पण की भावना के लिए उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है। उनके इस कदम से राज्य के सरकारी विभागों में एक नई चुस्ती और फुर्ती आने की उम्मीद है, जिससे जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।






