
फारबिसगंज सहरसा रेलखंड पर अब ट्रेनें दौंड़ेंगीं। तय हो गया है कि अब फिर से सहरसा से फारबिसगंज और जोगबनी तक के लिए ट्रेन चलेंगी। ऐसा पंद्रह साल बाद होने जा रहा है।
2008 में नेपाल के कुसहा बांध के टूटने से और बाढ़ आने से नरपतगंज, सुपौल की रेलवे लाइन जो सहरसा की ओर जाती है, पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। अब फिर ऐसा होने जा रहा है जब ट्रेन चलने की उम्मीद जगी है।
जानकारी के अनुसार, फारबिसगंज से नरपतगंज के बीच रेलखंड का निरीक्षण हो जाने और फारबिसगंज नरपतगंज से कोसी और मिथिलांचल तक रेलवे ट्रैक बिछने के कार्य की पूर्ण विराम के बाद नए रेल ट्रैक का नरपतगंज से फार बिसगंज के बीच बचे हुए कुल 17 किलोमीटर के इलाके का निरीक्षण भी हो गया है।
रेलवे की जानकारी में बताया गया है कि कोलकाता पूर्वी सर्किल के संरक्षा आयुक्त सुवोमोय मित्रा ने पहले नरपतगंज से फारबिसगंज तक मोटर ट्रॉली से निरीक्षण किया फिर स्पीड ट्रायल और 100 से 125 की रफ्तार से रेल इंजन चलाकर स्थिति का जायजा लेने के बाद रेलवे ने कहा कि अब फारबिसगंज के इलाके के लोगों में उम्मीद जगी है कि फार बिसगंज सहरसा रेलखंड पर आमान परिवर्तन कार्य 15 साल बाद पूरा हो गया है।
आपको बता दें, सहरसा से ललितग्राम तक कुल 94 किमी रेलखंड का आमान परिवर्तन का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका था। अब बचे हुए 17 किमी लंबे नरपतगंज से फारबिसगंज तक सीआरएस निरीक्षण के साथ ही यह परियोजना पूर्ण हो गई। सहरसा फारबिसगंज रेलखंड पर ट्रेन परिचालन से कोसी मिथिलांचल के लोग फारबिसगंज, जोगबनी, कटिहार जाने वाली ट्रेन से आवाजाही कर सकेंगे।







