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फ़रवरी, 22, 2026
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बिहार में अब आरबीएसके की टीम टीबी और कुष्ठ रोग की करेगी स्क्रीनिंग

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• 0-18 साल के बच्चे में टीबी व कुष्ठ रोग तलाशने की जिम्मेवारी भी आरबीएसके की टीम को दी गई • राज्य स्तर पर जिले के दो मास्टर ट्रेनर को दिया गया प्रशिक्षण • दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से लगातार खांसी हो तो चिकित्सक से करें संपर्क 
छपरा। कोरोना काल से राहत मिलने के बाद सभी स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्र खुलने के साथ ही आरबीएसके की टीम को भी स्क्रीनिंग के लिए सक्रिय किया जा रहा है। अब सभी स्कूलों व आंगनबाड़ी केन्द्र पर बच्चों को स्क्रीनिंग करने का निर्देश जारी कर दिया गया है। लेकिन स्क्रीनिंग के दायरा को इस बार बढ़ा दिया गया है। अब 0-18 साल के बच्चे में टीबी एवं कुष्ठ रोग तलाशने की जिम्मेवारी भी आरबीएसके की टीम को दी गई है।
इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर सभी सिविल सर्जन को निर्देश दिया है। अब राष्ट्रीय बाल कार्यक्रम के तहत बच्चों में टीबी और कुष्ठ के लक्षणों की पहचान, जांच,चिह्नित बच्चों को रेफरल की प्रक्रिया एवं नये संसोधित स्वास्थ्य कार्ड में संबंधित करने के लिए सभी चलंत चिकित्सा दलों को प्रशिक्षित किया जायेगा। राज्य स्तर पर प्रत्येक जिले के दो आरबीएसके के चिकित्सकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।
जिलास्तर पर दिया जायेगा प्रशिक्षण: 
आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों में टीबी और कुष्ठ रोग की पहचान करने के लिए जिला स्तर पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। साथ ही आरबीएसके के ऐप के बारे में भी जानकारी दी जायेगी। ताकि मरीज मिलने पर नाम, पता व अन्य संबंधित जानकारी लोड किया जा सके।
बच्चों में भी हो सकती है टीबी
सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने बताया कि 0-18 साल के बच्चों बच्चो में सामान्य रोग की तरह टीबी की समस्या हो सकती है। इस रोग का सबसे बड़ा कारण रहन सहन और खान-पान में अनियमितता है। बचाव के लिए पोषक तत्व के साथ-साथ पानी पर भी ध्यान दें। शरीर में कभी भी पानी की कमी होने न दें। जागरूकता और जानकारी के अभाव में भी लोग शुरुआती दौर में ही इसकी पहचान नहीं ही कर पाते हैं। जिसके कारण आगे चलकर यह गम्भीर रूप ले लेता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रारंभिक अवस्था में मे ही इसकी पहचान हो जाने से इसपर नियंत्रण में काफी साहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि लोगों को इस संबंध में जागरूक किये जाने की भी जरूरत है। इसलिए आंगनबाबड़ी केन्द्र और स्कूलों में आपके द्वारा की किए जाने वाली ले स्क्रीनिंग के दौरान अगर किसी कोई बच्चे बच्चा में टीबी वी या कुष्ठ रोग का लक्षण दिखता है तो उसकी सूचना पीएचसी या जिला स्तर पर जरूर दें।
दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से लगातार खांसी हो तो चिकित्सक से करें संपर्क:
सीएस ने बताया कि बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। वहीं कुपोषित बच्चे भी जल्दी टीबी के का शिकार हो जाते हैं। स्वस्थ्य बच्चे जब टीबी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो वह भी बीमार हो जाते हैं। यदि बच्चे को दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से लगातार खांसी आती है तो जांच कराना आवश्यक है। टीबी के कीटाणु बच्चे के फेफड़ों से शरीर के अन्य अंगों में बहुत जल्दी पहुंच जाते हैं। शुरुआत में बच्चों में हल्का बुखार बना रहता है। “
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