
पटना न्यूज़: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में अब आंतरिक बगावत और समीक्षा का तूफान उठ खड़ा हुआ है। हार की कड़वी सच्चाई ने पार्टी के अंदर ही कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब बागियों पर कड़ी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। आखिर किन नेताओं पर गिरेगी गाज, और क्या हैं पार्टी कार्यकर्ताओं के वो कड़े सवाल, जिसने शीर्ष नेतृत्व को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है?
बागियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर मंथन का दौर समाप्त हो चुका है और पार्टी अब उन नेताओं पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है, जिन्होंने चुनाव में बगावती तेवर दिखाए थे। पार्टी के उम्मीदवारों और विभिन्न पदाधिकारियों ने ऐसे बागियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को सौंपी है। मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के स्पष्ट निर्देश पर दर्जनों नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
मंगलवार को समीक्षा बैठकों का अंतिम दिन था, जहाँ पटना प्रमंडल के विभिन्न जिलों के अध्यक्ष, प्रधान महासचिव, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और अन्य पार्टी पदाधिकारी जुटे थे। इस बैठक में कार्यकर्ताओं ने अपनी बातों को बेबाकी से रखा और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर शीर्ष नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यकर्ताओं ने तेजस्वी के सामने रखीं तीखी मांगें
समीक्षा बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने तेजस्वी यादव के सामने कई महत्वपूर्ण और तीखी माँगें रखीं। उनका स्पष्ट मत था कि अगर पार्टी को भविष्य में सत्ता हासिल करनी है, तो कुछ मूलभूत बदलाव आवश्यक हैं। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि:
- तेजस्वी यादव को अपने आवास के दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुले रखने चाहिए।
- उन्हें कार्यकर्ताओं की बातों को गंभीरता से सुनना और समझना चाहिए।
- पार्टी संगठन के कार्यों में समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कार्यकर्ताओं का मानना था कि अनुभवी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर ही पार्टी अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पा सकती है और सत्ता में वापसी कर सकती है।
‘A to Z’ की परिकल्पना पर सवाल, अतिपिछड़ों की उपेक्षा
बैठक में कई नेताओं ने तेजस्वी यादव की ‘A to Z’ (सभी वर्ग) की परिकल्पना को नकार दिया। उनका तर्क था कि जब तक राजद 90 प्रतिशत आबादी, खासकर अतिपिछड़ों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित नहीं करेगा, तब तक पार्टी मजबूत नहीं हो सकती। कार्यकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि राजद नेताओं, विशेष रूप से तेजस्वी यादव को, इन वर्गों के सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहना चाहिए। उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना बेहद ज़रूरी है।
गरीब कार्यकर्ताओं के चुनाव लड़ने के मुद्दे पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कार्यकर्ताओं ने मंगनी लाल मंडल से पूछा कि आर्थिक रूप से कमजोर कार्यकर्ता चुनाव कैसे लड़ सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि क्या पार्टी कम से कम 10 गरीब कार्यकर्ताओं को अपने खर्च पर चुनाव लड़ाने की व्यवस्था कर सकती है।
संगठनात्मक कमजोरियाँ और चुनाव हार के अन्य कारण
पटना महानगर के कार्यकर्ताओं ने पार्टी संगठन की कमजोरी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि पटना में संगठन को मजबूत करने के लिए कभी भी गंभीरता से प्रयास नहीं किए गए, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा है। चुनाव में हार के एक प्रमुख कारण के रूप में जातीय हिंसा को बढ़ावा देने वाले गानों के इस्तेमाल को भी बताया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी में हरियाणा के लोगों की सक्रियता पर भी सवाल उठाए, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाहरी लोगों की भूमिका को लेकर भी असंतोष था। इन सभी आंतरिक कमियों और विवादों के बीच, राजद के लिए आने वाला समय और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।







