
Anant Singh: बिहार की राजनीति में फिर उबाल! मोकामा विधायक अनंत सिंह ने हालिया बातचीत में दो बड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी है, जिससे सियासी गलियारों में नई हलचल मच गई है। एक तरफ उन्होंने निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति से दूरी पर प्रतिक्रिया दी, तो दूसरी ओर बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर एक बड़ा सुझाव भी दे डाला।
निशांत कुमार पर अनंत सिंह का बयान
निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने को लेकर पिछले कई दिनों से अटकलों का बाजार गर्म था। चर्चा थी कि उन्हें सरकार में कोई अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो विधायक अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह निशांत का निजी फैसला है। उन्होंने बताया कि निशांत अभी सीखने की प्रक्रिया में रहना चाहते हैं और फिलहाल किसी भी पद को स्वीकार करने की इच्छा नहीं जताई है।
इस बयान से यह साफ हो गया कि निशांत अभी सक्रिय राजनीति से दूर ही रहेंगे। अनंत सिंह ने यह भी बताया कि उनकी व्यक्तिगत इच्छा थी कि निशांत राजनीति में आगे बढ़ें। उनका मानना था कि यदि निशांत जिम्मेदारी लेते तो उन्हें व्यापक समर्थन भी मिलता। उन्होंने संकेत दिया कि कई लोग राजनीतिक सहयोग देने के लिए तैयार थे, लेकिन अंतिम निर्णय निशांत का ही रहा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है।
शराबबंदी कानून पर नए सिरे से विचार की वकालत
इसी बातचीत के दौरान बिहार में लागू शराबबंदी कानून का मुद्दा भी उठा। इस कानून को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस के बीच अनंत सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्होंने इस फैसले का समर्थन किया था, लेकिन अब जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उनके मुताबिक, शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद इसका सेवन पूरी तरह रुका नहीं है, बल्कि गांवों और कस्बों में लोग अलग-अलग तरीकों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
विधायक ने सुझाव दिया कि सरकार को इस शराबबंदी नीति पर एक बार फिर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि शराब की बिक्री को नियंत्रित तरीके से शुरू किया जाए और साथ ही बेहद सख्त नियम लागू किए जाएं तो स्थिति में सुधार आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर उपद्रव करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे मामलों में सीधे जेल भेजने का प्रावधान भी किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उनके इस बयान के बाद राज्य में शराबबंदी कानून पर बहस एक बार फिर गरमा गई है।
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