Araria VIP Toilet News: बिहार के अररिया जिले में एक अस्थाई वीवीआईपी शौचालय के निर्माण पर हुए भारी भरकम खर्च ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक दिवसीय ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान बनाए गए इस विशेष शौचालय पर 7.41 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद राज्य में वीआईपी कल्चर और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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नीतीश कुमार के VVIP शौचालय पर गरमाई सियासत
बिहार जैसे सीमित संसाधनों वाले राज्य में वीआईपी कल्चर और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का यह एक बड़ा और गंभीर मामला बन गया है। अररिया के रानीगंज में जनवरी माह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘प्रगति यात्रा’ आयोजित की गई थी। इस यात्रा के दौरान, मुख्यमंत्री और अन्य अतिविशिष्ट मेहमानों के लिए कुछ देर के उपयोग हेतु एक अस्थाई वीवीआईपी शौचालय और यूरिनल का निर्माण किया गया था, जिसकी लागत अब सवालों के घेरे में है।
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के आधिकारिक दस्तावेजों और एक आरटीआई के खुलासे ने इस अस्थाई निर्माण पर लाखों रुपये फूंकने का सच सामने ला दिया है। इसके बाद से ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे जनकल्याण के लिए आवंटित होने वाले धन का इस्तेमाल कई बार ऐसी फिजूलखर्ची में हो जाता है, जिसका सीधा लाभ आम जनता को नहीं मिलता।
आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा, PHED विभाग घेरे में
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मामले को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि बिहार में कुछ ही मिनटों के उपयोग के लिए ‘रेड कार्पेट’ वाला एक अस्थाई वीवीआईपी शौचालय बनाया गया, जिस पर 7.41 लाख रुपये खर्च हुए। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि यह ‘कारनामा’ मुख्यमंत्री की एक घंटे की प्रगति यात्रा के लिए किया गया, जबकि मुख्यमंत्री ने वहां चंद सेकंड ही बिताए होंगे। उन्होंने इस पर हैरानी जताई कि यह सब अररिया जैसे गरीब और पिछड़े जिले में हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष ने इस भारी-भरकम खर्च की तुलना आम लोगों के लिए बनाए जाने वाले शौचालयों से की है। उन्होंने कहा कि एक आम आदमी को स्थायी शौचालय बनाने के लिए सरकार से मात्र 12,000 रुपये मिलते हैं, जिसमें भी अक्सर 20 प्रतिशत तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि जितने पैसों में यह एक अस्थाई वीवीआईपी शौचालय बना है, उतने में गरीब परिवारों के लिए 37 स्थायी शौचालय आसानी से बनाए जा सकते थे। यह देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें पूरी जानकारी आरटीआई के माध्यम से सामने आई है, जिसने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के अभियंता प्रमुख नित्यानंद प्रसाद ने 2 जून को महालेखाकार को एक औपचारिक पत्र भेजा था। इस पत्र में वित्तीय वर्ष 2024-25 के तहत लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, अररिया में वीआईपी टॉयलेट निर्माण पर खर्च हुई राशि की निकासी और आवंटन की विस्तृत जानकारी दी गई थी। सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद से विभाग की कार्यशैली और उसके वित्तीय निर्णयों पर गहन जांच की मांग उठ रही है।
जनता के पैसों की बर्बादी पर उठे तीखे सवाल
विभागीय पत्रों और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रानीगंज प्रखंड में इस वीआईपी निर्माण कार्य के लिए एक भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया था। जनवरी माह में आयोजित हुए इस मुख्यमंत्री कार्यक्रम के लिए विभाग द्वारा 7.41 लाख रुपये की कुल राशि स्वीकृत की गई थी। इस राशि की निकासी और व्ययन पदाधिकारी, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल अररिया के कार्यपालक अभियंता को बनाया गया था।
यह पूरी राशि अररिया जिला कोषागार से निकाली जानी थी, जो सीधे तौर पर राज्य की मेहनतकश जनता के टैक्स का पैसा है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि वीआईपी के लिए तैयार किया गया यह शौचालय और मूत्रालय पूर्णतः अस्थाई प्रकृति का था। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद ही इसे वहां से हटा दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि इसका निर्माण केवल एक कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने और वीआईपी सुविधाओं को पूरा करने के लिए किया गया था, न कि दीर्घकालिक जनसुविधा के लिए।
जनता के धन के इस दुरुपयोग पर व्यापक रोष देखा जा रहा है। विशेषकर ऐसे समय में जब राज्य के कई हिस्सों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, ऐसी फिजूलखर्ची से लोगों में निराशा बढ़ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार को अब इस मामले पर जनता को जवाब देना होगा कि क्यों एक अस्थाई सुविधा पर इतनी बड़ी राशि खर्च की गई, जिसे बाद में हटा भी दिया गया। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में हैं और आने वाले समय में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गरमा सकता है। इस घटना ने सरकारी विभागों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।
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