

Bihar Irrigation: धरती का सीना चीरकर भी अगर पानी न मिले, तो कैसी विडंबना! जब खेत प्यासे रह जाएं और अन्नदाता बेबस खड़ा हो, तब यह केवल एक समस्या नहीं, बल्कि एक करुण पुकार बन जाती है। ऐसी ही एक मार्मिक कहानी सामने आई है गया जिले के बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र से, जहां सालों से किसान सिंचाई के लिए जूझ रहे हैं।
बिहार सिंचाई: बाराचट्टी की प्यासी धरती, समाधान कब?
Bihar Irrigation: बाराचट्टी (गया) से विधायक ज्योति देवी ने बिहार विधानसभा में एक ज्वलंत मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान अपने क्षेत्र की वर्षों पुरानी सिंचाई समस्या की ओर आकर्षित किया। विधायक ने बताया कि बाराचट्टी इलाके में किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और आजीविका संकट में है। यह केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे राज्य में ‘Water Scarcity’ के बढ़ते संकट का एक उदाहरण है।
किसानों का कहना है कि जल के अभाव में उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। फसलें सूख रही हैं, और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में वे अक्सर सरकार से मदद की गुहार लगाते रहते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह स्थिति न केवल किसानों को हताश कर रही है, बल्कि कृषि उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
किसानों का दर्द और सरकारी उदासीनता
विधायक ज्योति देवी ने अपने सवाल में जोर देकर कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और स्थायी समाधान निकालने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बाराचट्टी क्षेत्र में सिंचाई के समुचित प्रबंध किए जाएं ताकि किसान बिना किसी चिंता के खेती कर सकें। जल संसाधनों के उचित प्रबंधन और नई सिंचाई परियोजनाओं की सख्त जरूरत है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्थानीय किसानों का कहना है कि मानसून पर अत्यधिक निर्भरता के कारण हर साल उन्हें अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। नहरों और तालाबों का जीर्णोद्धार नहीं होने से जल संचयन की व्यवस्था भी लचर है। यह ‘Water Scarcity’ की समस्या को और गहरा कर रहा है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस मामले में सरकार का जवाब और आगे की कार्रवाई क्या होगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। बाराचट्टी के किसानों को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और जल्द ही उन्हें सिंचाई के पानी की किल्लत से निजात मिलेगी।


