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फ़रवरी, 25, 2026
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Bihar HIV Crisis: बिहार में एड्स का विकराल रूप! स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकारा 1 लाख से ज़्यादा मरीज, कौन है समाधान?

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Bihar HIV Crisis: जब जीवन और मृत्यु के बीच की रेखा धुंधली हो जाए और एक अदृश्य शत्रु समाज की नींव पर वार करे, तब ऐसी खबरें सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक विवेक पर सवाल बन जाती हैं। बिहार में एचआईवी/एड्स को लेकर ताज़ा सरकारी पुष्टि ने एक बार फिर राज्य के स्वास्थ्य तंत्र और सामाजिक जागरूकता दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

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Bihar HIV Crisis: बिहार में एड्स की बढ़ती चुनौती और सरकारी आंकड़े

राज्य में एड्स से पीड़ित लोगों की संख्या एक लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। यह चौंकाने वाली जानकारी बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने खुद विधान परिषद में दी। उनके बयान ने न केवल राज्यभर में चिंता की लहर फैला दी है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस गंभीर बीमारी से लड़ने के लिए मौजूदा प्रयास शायद नाकाफी साबित हो रहे हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की चुनौती को और भी गहरा करती है।

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मंत्री पांडेय ने बताया कि राज्य में कुल 1,00,317 लोग एचआईवी/एड्स से संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से सबसे अधिक मामले पटना, मुजफ्फरपुर और सिवान जिलों से सामने आए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि कुछ विशेष क्षेत्रों में इस बीमारी का फैलाव अधिक है, जिसके लिए विशेष रणनीतियों की आवश्यकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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सरकारी प्रयास और जमीनी हकीकत

सरकार की ओर से एंटी-रेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) केंद्रों के माध्यम से मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। कुल 22 ART केंद्र राज्यभर में संचालित हो रहे हैं, जहां मरीजों को जीवनरक्षक दवाएं और परामर्श दिए जाते हैं। हालांकि, इन केंद्रों की संख्या और पहुंच पर भी सवाल उठते रहे हैं, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में।

मंत्री ने बताया कि एआरटी केंद्रों में 60,617 मरीज नियमित रूप से इलाज करा रहे हैं। इसका मतलब यह भी है कि लगभग 40,000 संक्रमित मरीज अभी भी या तो इलाज से वंचित हैं या फिर उनका पता नहीं चल पाया है, जो एक बड़ी चिंता का विषय है। इस अंतर को पाटना स्वास्थ्य विभाग की चुनौती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी/एड्स के मामलों में वृद्धि का एक प्रमुख कारण जागरूकता की कमी और प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यौन शिक्षा और सुरक्षित व्यवहार के प्रति जानकारी का अभाव भी स्थिति को गंभीर बना रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

आगे की राह और सामाजिक जिम्मेदारी

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। इसमें व्यापक जन जागरूकता अभियान, ग्रामीण क्षेत्रों तक एआरटी सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, और संवेदनशील समूहों पर विशेष ध्यान देना शामिल है। स्कूलों और कॉलेजों में यौन शिक्षा को अनिवार्य करना भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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यह सिर्फ सरकारी समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों के प्रति भेदभाव को समाप्त करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उनका इलाज। सामूहिक प्रयासों से ही हम इस अदृश्य खतरे से निपट सकते हैं और एक स्वस्थ बिहार का निर्माण कर सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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