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फ़रवरी, 23, 2026
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Bihar Budget 2026-27: बिहार विधानसभा में पास हुआ 3.47 लाख करोड़ का विनियोग विधेयक, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

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Bihar Budget: जब राज्य की तिजोरी का हिसाब-किताब संसद के गलियारों में बहस का केंद्र बन जाए, तो समझिए बात सिर्फ आंकड़ों की नहीं, भविष्य की दिशा की भी है।

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Bihar Budget 2026-27: बिहार विधानसभा में पास हुआ 3.47 लाख करोड़ का विनियोग विधेयक, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

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Bihar Budget: विनियोग विधेयक और राज्य की वित्तीय चुनौतियाँ

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बिहार विधानसभा में सोमवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यय की अनुमति देने वाला बिहार विनियोग विधेयक पारित हो गया। यह विधेयक राज्य सरकार को आगामी वित्तीय वर्ष में विभिन्न विभागों और योजनाओं पर खर्च करने का अधिकार देता है। हालांकि, इस भारी-भरकम राशि के साथ ही राज्य की आर्थिक सेहत, ट्रेजरी की स्थिति और विभिन्न विभागों में बजट कटौती को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष ने सरकार पर राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

यह भी पढ़ें:  Bihar Politics: विधानसभा में गरमाया 'लॉ एंड ऑर्डर' का मुद्दा, सरकार पर चौतरफा हमला, पढ़िए सदन के अंदर और बाहर

विनियोग विधेयक का पारित होना किसी भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह उसे शासन चलाने और लोक कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए आवश्यक वित्तीय शक्तियां प्रदान करता है। इस बार, बिहार सरकार ने एक बड़े बजट के साथ राज्य के विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि सरकार के दावे और ज़मीनी हकीकत में फर्क है। उन्होंने ट्रेजरी की नाजुक स्थिति और कई विभागों में हुई अप्रत्याशित बजट कटौती पर सवाल उठाए हैं, जिससे विकास कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है।

विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि वित्तीय कुप्रबंधन के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। उनका कहना था कि सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन अंदरूनी तौर पर विभाग धन की कमी से जूझ रहे हैं। यह स्थिति उन विभागों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जो सीधे जनता से जुड़े हैं, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि।

विभागीय कटौती और विपक्ष के सवाल

सरकार ने विनियोग विधेयक को राज्य के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जबकि विपक्ष इसे वित्तीय अराजकता का संकेत मान रहा है। विधानसभा में हुई बहस के दौरान, विपक्षी सदस्यों ने एक-एक करके विभिन्न विभागों की बजट कटौतियों का हवाला दिया और सरकार से पूछा कि ऐसे में विकास योजनाओं को कैसे पूरा किया जाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे।

इस विधेयक के पारित होने के बाद भी, बिहार के वित्तीय प्रबंधन और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल बरकरार हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन चुनौतियों का सामना कैसे करती है और विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब देती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। सरकार का कहना है कि बजट प्रावधानों को कुशलता से लागू किया जाएगा ताकि राज्य की प्रगति सुनिश्चित हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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