
Bihar Assembly News: बिहार विधानसभा का 105वां स्थापना दिवस आज लोकतांत्रिक परंपराओं और तकनीकी परिवर्तन के एक अनोखे संगम के रूप में दर्ज हो गया, जिसने सिर्फ इतिहास को नहीं दोहराया बल्कि आने वाले कल की राह भी दिखाई।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एक दिवसीय बिहार दौरे पर आज पटना पहुँचे और बिहार विधान सभा के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बिहार की धरती लोकतांत्रिक परंपराओं की जन्मस्थली रही है और यहाँ की विरासत ने देश की संसदीय व्यवस्था को वैचारिक आधार प्रदान किया है। श्री बिरला ने कहा कि सशक्त विधायक ही सशक्त लोकतंत्र की नींव है।

उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास से सशक्त जनप्रतिनिधि समस्याओं को समाधान तक ले जाकर लोकतंत्र को ऊर्जा देते हैं और कानून निर्माण को सार्थक बनाते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायक की वास्तविक शक्ति नैतिक मूल्यों, जिम्मेदारी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के ज्ञान से आती है।उन्होंने कहा कि एक सक्षम विधायक शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाता है। श्री बिरला ने कहा कि PRIDE संस्थान विधायकों की क्षमता निर्माण का सशक्त मंच बन गया है और बदलते समय में प्रशिक्षण नए तथा अनुभवी दोनों विधायकों के लिए आवश्यक है।

उन्होंने विधायी ड्राफ्टिंग, नियमों की समझ और शोध आधारित अनुभवों को गुणवत्तापूर्ण कानून निर्माण का आधार बताया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन लोकतंत्र का मंदिर है और उसकी गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि का सर्वोच्च दायित्व है।उन्होंने चिंता जताते हुए कहा की आज हम देख रहे हैं की किस प्रकार सभागृहों की मर्यादा घट रही है। उन्होंने नारेबाजी, व्यवधान और वेल में आने जैसी प्रवृत्तियों से बचकर संवाद और तर्क के माध्यम से अपनी बात रखने की अपील की।उन्होंने कहा की जिस विधानसभा के जन प्रतिनिधि संविधान को जानेंगे, हमारी लोकतंत्र की गरिमा को समझेंगें,सदन में सार्थक चर्चा करेंगे, वही विधानसभाएं सशक्त होंगी।

श्री बिरला ने विधायकों से कहा कि वे ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों, किसानों, महिलाओं और युवाओं की आवाज़ को प्राथमिकता देकर सदन में उठाएँ। ताकी जन-जन की आवाज सदन तक पहूँचे और उसका त्वरित समाधान हो सके।अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नेवा (NeVA) प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिहार विधान सभा का डिजिटल होना बड़ी उपलब्धि है, जिससे कार्यवाही अधिक पारदर्शी और तथ्य आधारित होगी।उन्होंने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड और डेटा विधायकों को हर बहस में मजबूत प्रस्तुतिकरण करने में मदद करेंगे।
बिहार असेंबली न्यूज: बिहार विधानसभा के 105वें स्थापना दिवस पर लोकतंत्र का उत्सव और तकनीकी क्रांति
बिहार असेंबली न्यूज: लोकतांत्रिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण
लोकतंत्र की बगिया में 105 वसंत देख चुकी बिहार विधानसभा आज अपने गौरवशाली अतीत और उज्जवल भविष्य के संगम पर खड़ी थी। इस ऐतिहासिक अवसर पर, जहां एक ओर पुरानी परंपराओं को नमन किया गया, वहीं आधुनिकता की ओर बढ़ते कदमों को भी सराहा गया। विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ सिर्फ एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि राज्य के विधायी इतिहास का एक जीवंत अध्याय था। इस कार्यक्रम ने न केवल बीते इतिहास की यादें ताजा कीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय की।इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संबोधित किया। उन्होंने अपने ओम बिरला का संबोधन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, जन प्रतिनिधियों की भूमिका और बदलते समय के साथ विधायिका के अनुकूलन पर विशेष बल दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों ही स्तंभों को मिलकर लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए। बिरला ने तकनीकी के समावेश को समय की मांग बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर विधानसभा के समृद्ध इतिहास और उसकी उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा ने देश की लोकतांत्रिक यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सदन की कार्यवाही को और अधिक प्रभावी बनाने के संकल्प को दोहराया।
भविष्य की राह और तकनीकी नवाचार
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे तकनीक को अपनाकर विधायी कार्यों को और सुगम बनाया जा सकता है। डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन बहस और जनता से सीधे संवाद के माध्यमों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई। यह सिर्फ कागज रहित कार्यप्रणाली की ओर बढ़ना नहीं, बल्कि सूचनाओं को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना भी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंविधानसभा के 105 वर्ष पूरे होने पर यह विचार-मंथन हुआ कि कैसे अगले दशकों में इसे और अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनाया जाए। युवाओं को लोकतंत्र की प्रक्रिया से जोड़ने और उन्हें विधायी कार्यों के प्रति जागरूक करने पर भी बल दिया गया। ओम बिरला का संबोधन विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित था कि कैसे विधायकों को जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। यह एक ऐसा मंच था जहां बीते कल की सीख से आज की चुनौतियों का सामना करने और कल के लिए एक सशक्त नींव तैयार करने का संकल्प लिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


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