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फ़रवरी, 10, 2026
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Bihar Assembly News: महिला अपराध पर गरमाया सदन, विपक्ष के जोरदार हंगामे से कार्यवाही बाधित

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Bihar Assembly News: लोकतंत्र के मंदिर में जब जनता की आवाज गूंजती है, तो कभी-कभी बहस और हंगामे का बवंडर उठना स्वाभाविक है। बिहार विधानसभा में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब विपक्ष महिला अपराध को लेकर सरकार को घेरने की मुद्रा में था।

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बिहार विधानसभा समाचार: महिला अपराध पर गरमाया सदन, विपक्ष के जोरदार हंगामे से कार्यवाही बाधित

महिला अपराध पर बिहार विधानसभा समाचार: विपक्ष की तत्काल चर्चा की मांग

सुबह कार्यवाही शुरू होते ही सदन का माहौल अचानक गरमा गया। विपक्षी दलों के विधायक महिला अपराध के बढ़ते मामलों पर तत्काल चर्चा कराने की मांग को लेकर अपनी सीटों से खड़े हो गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे। उनका आरोप था कि राज्य में महिला सुरक्षा का माहौल लगातार बिगड़ रहा है और सरकार इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है।

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शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से शांत होने और नियमों का पालन करने का आग्रह किया। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को शून्यकाल के दौरान उठाया जा सकता है, जिसके लिए पहले से नोटिस देना होता है। लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा और सदन में हंगामा जारी रहा, जिससे सामान्य कार्यवाही बाधित हुई। यह खबर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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विपक्षी विधायकों का कहना था कि महिला अपराध एक गंभीर विषय है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उनका तर्क था कि ऐसी संवेदनशील घटनाओं पर सदन में तुरंत चर्चा होनी चाहिए, न कि इसे नियमों की बेड़ियों में बांधा जाए। हंगामे के कारण कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित भी करना पड़ा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के हंगामे को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि सरकार महिला सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने विपक्ष से सदन की गरिमा बनाए रखने और सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की।

शून्यकाल बनाम तत्काल चर्चा: क्या कहते हैं नियम?

संसदीय नियमों के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए एक प्रक्रिया का पालन करना होता है। आमतौर पर शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से ऐसे विषयों को सदन के पटल पर रखा जाता है। शून्यकाल में सदस्य बिना किसी पूर्व सूचना के सार्वजनिक महत्व के मामले उठा सकते हैं, बशर्ते उन्हें अध्यक्ष की अनुमति मिल जाए। विपक्षी सदस्यों की मांग थी कि महिला अपराध के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए यह मुद्दा इतना गंभीर है कि इसे तत्काल चर्चा के लिए लिया जाए, न कि शून्यकाल तक इंतजार किया जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

सदन में उत्पन्न गतिरोध के बाद, अध्यक्ष ने एक बार फिर सभी दलों से शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें अपने मुद्दों को उठाने के लिए चुना है, और यह तभी संभव है जब सदन सुचारु रूप से चले। विपक्ष ने हालांकि अपने विरोध का सिलसिला जारी रखा, जिसके बाद आगामी रणनीति पर विचार करने के लिए विभिन्न दलों के नेताओं ने अनौपचारिक बैठकें कीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि बिहार में राजनीतिक सरगर्मी तेज है और महिला अपराध का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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