
Bihar Assistant Professor Recruitment: बिहार के विश्वविद्यालयों की अकादमिक दुनिया में बदलाव की एक बड़ी लहर उठ रही है, क्योंकि राजभवन ने सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की पूरी तस्वीर ही बदलने की तैयारी कर ली है। अब यह पद पाना लोहे के चने चबाने जैसा हो सकता है।
Bihar Assistant Professor Recruitment: क्यों अनिवार्य हुई पीएचडी डिग्री की गहन जांच?
बिहार में Bihar Assistant Professor Recruitment की प्रक्रिया को लेकर प्रस्तावित नए नियमों के मसौदे के अनुसार, अब पीएचडी डिग्री की वैधता का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। यह उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस सत्यापन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की होगी। यदि किसी कारणवश रजिस्ट्रार उपलब्ध नहीं हैं, तो संकाय अध्यक्ष (डीन) इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरा करेंगे। प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल योग्य और सही मायनों में शोध कर चुके अभ्यर्थी ही इस प्रतिष्ठित पद तक पहुंचें।
नई नियमावली के मसौदे में पीएचडी डिग्री के सत्यापन के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर जांच को अनिवार्य किया गया है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की कोई गुंजाइश न रहे। ये पांच शर्तें इस प्रकार हैं:
- अभ्यर्थी को यह साबित करना होगा कि उसकी पीएचडी डिग्री नियमित (रेगुलर) पद्धति से प्राप्त की गई है।
- शोधार्थी के शोध-प्रबंध (थीसिस) का मूल्यांकन कम से कम दो बाहरी परीक्षकों द्वारा किया गया हो।
- शोध कार्य के दौरान एक खुली मौखिक परीक्षा (Viva-Voce) का आयोजन अनिवार्य रूप से हुआ हो।
- अभ्यर्थी के शोध कार्य से संबंधित कम से कम दो शोध पत्र प्रकाशित हुए हों, जिनमें से एक किसी समीक्षित (Peer-Reviewed) शोध पत्रिका में छपा होना अनिवार्य है।
- अभ्यर्थी ने अपने शोध विषय से जुड़े किसी सम्मलेन या संगोष्ठी में कम से कम एक शोध पत्र प्रस्तुत किया हो, जिसका आयोजन यूजीसी, सीएसआईआर या किसी अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान ने किया हो।
इस नई व्यवस्था में एक और अहम प्रावधान जोड़ा गया है। विश्व के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों से पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को सीधे नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा। ऐसे उम्मीदवारों को राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) से छूट दी जाएगी। यह छूट उन विषयों के अभ्यर्थियों को भी मिलेगी, जिनमें नेट की परीक्षा आयोजित नहीं होती है। इससे बिहार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कैसी होगी 200 अंकों की नई चयन प्रक्रिया?
प्रस्तावित नियमावली के तहत चयन प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब सहायक प्राध्यापक पद के लिए कुल 200 अंकों की एक विस्तृत चयन प्रक्रिया होगी। इसमें 160 अंकों की एक वर्णनात्मक (Descriptive) लिखित परीक्षा और 40 अंकों का साक्षात्कार शामिल होगा। लिखित परीक्षा का उद्देश्य अभ्यर्थियों के विषय ज्ञान और उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता का गहराई से मूल्यांकन करना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस पद के लिए न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतम आयु 45 वर्ष निर्धारित की गई है। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब कार्य अनुभव (Work Experience) के लिए कोई अतिरिक्त अंक नहीं दिए जाएंगे। राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET), कनिष्ठ अनुसंधान फेलोशिप (JRF) और पीएचडी जैसी योग्यताओं को केवल न्यूनतम पात्रता माना जाएगा, इनका कोई वेटेज नहीं होगा। पूरी भर्ती प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के माध्यम से आयोजित की जाएगी और साक्षात्कार समिति में केवल प्रोफेसर स्तर के विशेषज्ञ ही शामिल होंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
नए मसौदे पर क्यों उठ रहे हैं विरोध के सुर?
हालांकि इन बदलावों का उद्देश्य गुणवत्ता बढ़ाना है, लेकिन इस प्रस्तावित नियमावली का विरोध भी शुरू हो गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह व्यवस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के वर्ष 2018 के नियमों के विपरीत है और इससे कई योग्य अभ्यर्थियों का नुकसान हो सकता है। फिलहाल, राजभवन ने इस मसौदे को राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के पास उनके सुझाव और अनुमोदन के लिए भेजा है। सभी कुलपतियों से सहमति प्राप्त होने के बाद ही इस नई नियमावली को अंतिम रूप देकर प्रदेश में लागू किया जाएगा।


