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मार्च, 19, 2026
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Bharat Electricity Summit 2026 में बिहार ने दुनिया को दिखाया दम, ‘फोकस स्टेट’ बन खींचा निवेशकों का ध्यान

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Bharat Electricity Summit 2026: जैसे कोई गुमनाम सितारा अचानक अपनी चमक से पूरी आकाशगंगा को रोशन कर दे, कुछ वैसी ही कहानी बिहार ने ऊर्जा के वैश्विक मंच पर लिखी है। नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इस भव्य आयोजन में ‘फोकस स्टेट’ के तौर पर बिहार ने जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी दस्तक दी है, उसने यह साफ कर दिया है कि यह प्रदेश अब ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का एक मजबूत और भरोसेमंद केंद्र बनने की राह पर अग्रसर है। राज्य ने न केवल अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा, बल्कि वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ भविष्य की संभावनाओं पर एक मजबूत संवाद भी कायम किया।

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Bharat Electricity Summit 2026: बिहार पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र

समिट के दौरान बिहार का पवेलियन लगातार प्रतिनिधियों और निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बना रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने पवेलियन पहुंचकर राज्य की ऊर्जा क्षेत्र में की गई पहलों और भविष्य की योजनाओं को गहराई से समझा। बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (बीएसपीएचसीएल) की विशेषज्ञ टीम ने मौके पर मौजूद रहकर निवेशकों के हर सवाल का जवाब दिया और सहयोग के नए रास्ते तलाशे। इस दौरान उद्योग जगत के कई बड़े प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बैठकें हुईं, जिनमें भविष्य की परियोजनाओं पर गंभीर मंथन हुआ और एक सकारात्मक माहौल बना।

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Bharat Electricity Summit 2026 में बिहार ने दुनिया को दिखाया दम, 'फोकस स्टेट' बन खींचा निवेशकों का ध्यान

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार के प्रति गहरी दिलचस्पी देखी गई। विभिन्न देशों और वैश्विक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बिहार की नीतियों, प्रगति और भविष्य के विजन को सराहा। इन मुलाकातों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि बिहार अब वैश्विक ऊर्जा निवेश के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर रहा है और आने वाले समय में बड़े पैमाने पर पूंजी आकर्षित करने की क्षमता रखता है।

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दो दशकों का कायाकल्प: 700 से 8,700 मेगावाट तक का सफर

बिहार की इस मजबूत दावेदारी के पीछे पिछले 20 वर्षों में हुआ अभूतपूर्व परिवर्तन है। वर्ष 2005 में जहां राज्य मात्र 700 मेगावाट बिजली पर निर्भर था, वहीं आज यह 8,700 मेगावाट से अधिक की भारी मांग को सहजता से पूरा कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आज राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध है और 2.2 करोड़ से अधिक उपभोक्ता इस मजबूत नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं। यह बदलाव हर घर तक विकास की रोशनी पहुंचाने जैसा है।

इस सफलता की नींव मजबूत बुनियादी ढांचे पर रखी गई है। पारेषण क्षमता में लगभग 20 गुना की भारी वृद्धि, वितरण नेटवर्क का पांच गुना से अधिक विस्तार, और ग्रिड सबस्टेशनों की संख्या 45 से बढ़कर 175 तक पहुंचना इस बदलाव की कहानी कहते हैं। यह मजबूत विद्युत नेटवर्क औद्योगिक विकास को गति देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे भविष्य में बड़े ऊर्जा निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

घाटे से मुनाफे की ओर: वितरण कंपनियों की बदली वित्तीय तस्वीर

एक समय था जब राज्य की बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) भारी घाटे से जूझ रही थीं। लेकिन कुशल प्रबंधन और सुधारों की बदौलत आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। वित्त वर्ष 2021 में 1,942 करोड़ रुपये के घाटे से उबरकर वित्त वर्ष 2025 तक 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के मुनाफे तक पहुंचना एक असाधारण उपलब्धि है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एटी एंड सी घाटा घटकर लगभग 15 प्रतिशत पर आ गया है, और दोनों डिस्कॉम्स को मिली ‘ए’ रेटिंग उनकी बेहतर वित्तीय स्थिति और परिचालन दक्षता को प्रमाणित करती है।

डिजिटल क्रांति और भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाएं

ऊर्जा सेवाओं को डिजिटल बनाने में बिहार ने देश के कई राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। राज्य में 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे बिलिंग में पारदर्शिता आई है और राजस्व संग्रह में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। इसके अलावा, ईआरपी सिस्टम, एकीकृत आईटी डैशबोर्ड और केंद्रीकृत कमांड सेंटर जैसी आधुनिक प्रणालियों ने पूरे तंत्र को अधिक जवाबदेह और कुशल बनाया है।

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बिहार सरकार ने भविष्य के लिए एक स्पष्ट और महत्वाकांक्षी विजन तैयार किया है। अगले पांच वर्षों में, राज्य की ऊर्जा अवसंरचना को उन्नत करने के लिए टीबीसीबी मोड के माध्यम से 81,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश की योजना है। इस योजना के तहत:

  • बिजली उत्पादन: 38,950 करोड़ रुपये
  • ट्रांसमिशन मजबूती: 16,194 करोड़ रुपये
  • वितरण सुदृढ़ीकरण: 22,951 करोड़ रुपये
  • रखरखाव: 3,346 करोड़ रुपये
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पीरपैंती और कजरा में सौर एवं बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति बिहार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। राज्य की नई पंप्ड स्टोरेज नीति के तहत कुछ ही महीनों में 13,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलना, निवेशकों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत बिहार का लक्ष्य 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 6.1 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना है, जो प्रदेश को एक आकर्षक ऊर्जा निवेश गंतव्य बनाता है। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट में बिहार की यह भागीदारी सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक ऐलान है कि बिहार अब रुकने वाला नहीं है।

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