
बिहार भूमि रिकॉर्ड्स: बिहार में जमीन से जुड़े लाखों लंबित मामले लोगों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। अब इन मामलों के जल्द निपटारे को लेकर बिहार सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर सभी पुराने आवेदनों को 30 जून तक निपटाने का निर्देश दिया है।
विशेष अभियान: लंबित आवेदनों का होगा जल्द निपटारा
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि पिछले साल चलाए गए राजस्व महा-अभियान के दौरान जो भी आवेदन मिले थे, उनका जल्द से जल्द निष्पादन किया जाए।
बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बताया गया कि अब तक 81 प्रतिशत आवेदनों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है। मंत्री ने 31 मई तक सभी शेष आवेदनों को ऑनलाइन अपलोड करने का निर्देश दिया, ताकि तय शेड्यूल के अनुसार उनका तेजी से निपटारा हो सके।
किसान रजिस्ट्री और डिजिटलीकरण की प्रगति
बैठक में फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान और एग्रिस्टैक योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि राज्य में 30 जून तक चलने वाले एग्रिस्टैक अभियान के तहत 6.60 लाख जमाबंदियों में सुधार का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमाबंदी सुधार के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, क्योंकि इसके पूरा होने के बाद ही फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान में तेजी आएगी।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और केंद्र सरकार द्वारा तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए यह काम बेहद जरूरी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बिहार भूमि रिकॉर्ड्स को आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण की समीक्षा में बताया गया कि राज्य के लगभग 33 करोड़ पन्नों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है। इसका लाभ यह हुआ है कि अब लोगों को जमीन से जुड़े दस्तावेजों की ऑनलाइन नकल आसानी से मिल रही है, और अब तक 15 लाख से अधिक लोगों को यह सुविधा मिल चुकी है।
48 हजार लंबित मामले और बिहार भूमि रिकॉर्ड्स की स्थिति पर विचार
ई-मापी से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान मंत्री ने चिंता जताई कि अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की हालिया हड़ताल के कारण लगभग 48 हजार जमीन मापी के लंबित मामले जमा हो गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इन सभी लंबित मामलों का निष्पादन 30 जून तक हर हाल में किया जाए। मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य के करीब 8 हजार गांवों के कैडेस्ट्रल खतियान, जो कि महत्वपूर्ण बिहार भूमि रिकॉर्ड्स का हिस्सा हैं, गायब हैं। इनकी खोज के लिए सरकार जल्द ही विज्ञापन जारी करेगी और आम लोगों से भी सहयोग मांगा जाएगा। यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसे पुराने खतियान की प्रति उपलब्ध है, तो उसे सरकार को प्रदान करने का आग्रह किया गया है। इसके अतिरिक्त, बैठक में भू-लगान की मौजूदा स्थिति की भी समीक्षा की गई और अधिकारियों को भू-लगान की दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






