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फ़रवरी, 16, 2026
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Bihar Biofuel Pumps: गांवों में खुलेगी बायोडीजल रिटेल आउटलेट, पहुंचेगी हरित ऊर्जा, जानिए क्या है बायोफ्यूल पंप खोलने की राह और आसानी

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Bihar Biofuel Pumps: बिहार की ग्रामीण सड़कों पर अब एक नई क्रांति दस्तक देने वाली है, जहां पारंपरिक ईंधन की जगह हरित ऊर्जा का विकल्प हर गांव तक पहुंचेगा। यह सिर्फ तेल नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति एक बड़ा कदम है।

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Bihar Biofuel Pumps: गांवों तक पहुंचेगी हरित ऊर्जा, बिहार में बायोफ्यूल पंप खोलने की राह हुई आसान

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बिहार में Bihar Biofuel Pumps: गांवों तक बायोफ्यूल की आसान पहुंच

बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी चल रही है। अब गांवों में भी गैर-पारंपरिक पेट्रोल पंप, जिन्हें बायोफ्यूल पंप या बायोडीजल रिटेल आउटलेट कहते हैं, खोलना पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगा। ग्रामीण कार्य विभाग ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इंजीनियरों की एक समिति का गठन किया है। इस समिति का मुख्य कार्य ग्रामीण सड़कों के किनारे इन हरित ईंधन स्टेशनों तक पहुँचने के लिए पहुँच पथ (एक्सेस रोड) बनाने की प्रक्रिया को निर्धारित करना है। यह बिल्कुल पथ निर्माण विभाग की तर्ज पर काम करेगा, जो राज्य की सड़कों के किनारे खुलने वाले पारंपरिक पेट्रोल पंपों के लिए रास्ता मुहैया कराता है।

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विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण कार्य विभाग के क्षेत्राधिकार में आने वाली ग्रामीण सड़कों के किनारे पहले से ही पेट्रोलियम रिटेल आउटलेट, किसान सेवा केंद्र या ‘हमारा पंप’ स्थापित किए जा रहे हैं। इन तक पहुँचने के लिए अक्सर सरकारी भूमि का उपयोग पहुँच पथ के रूप में किया जाता है। सड़क से पंप तक आने-जाने का रास्ता बनाने के लिए सरकारी भूमि के उपयोग संबंधी नियम-कानून 2018 में ही तय कर दिए गए थे। अब इसी क्रम में, ग्रामीण सड़कों के किनारे बायोडीजल रिटेल आउटलेट या बायोफ्यूल पंप स्थापित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने हेतु कई कार्यपालक अभियंताओं ने विभाग को अपनी अनुशंसाएँ भेजी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, ग्रामीण कार्य विभाग ने निर्णय लिया है कि पथ निर्माण विभाग की भांति ही ग्रामीण सड़कों के किनारे इन पर्यावरण अनुकूल ईंधन पंपों को खोलने की अनुमति दी जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए, विभाग ने अभियंता प्रमुख सह अपर आयुक्त सह विशेष सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति में सदस्य के रूप में अभियंता प्रमुख, मुख्य अभियंता निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण, मुख्य अभियंता अनुरक्षण एवं उन्नयन और अधीक्षण अभियंता सह नोडल पदाधिकारी पीएमजीएसवाई जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

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क्या हैं बायोफ्यूल पंप और क्यों हैं ये महत्वपूर्ण?

यह विशेषज्ञ इंजीनियरों की समिति ग्रामीण कार्य विभाग को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि ग्रामीण सड़कों के किनारे बायोफ्यूल पंप या बायोडीजल रिटेल आउटलेट खोलने के लिए अनुमति देने की पूरी प्रक्रिया क्या होनी चाहिए। समिति से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, ग्रामीण कार्य विभाग इन हरित ऊर्जा स्टेशनों को स्थापित करने की अनुमति देना शुरू कर देगा, जिससे बिहार के गांवों में स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी। यह कदम न केवल ग्रामीण विकास को गति देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

**बायोफ्यूल पंप क्या होते हैं?**
बायोफ्यूल पंप या बायोडीजल रिटेल आउटलेट पारंपरिक पेट्रोल पंपों से अलग होते हैं, हालांकि ईंधन भरवाने का उनका तरीका लगभग समान होता है। ये मुख्य रूप से वनस्पति तेलों, पशु वसा या अन्य जैविक कचरे से बने डीजल की बिक्री के लिए स्थापित किए जाते हैं। बायोडीजल पंपों पर आपको शुद्ध बायोडीजल या फिर इसे मिश्रित रूप में प्राप्त कर सकते हैं, जो पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल होता है।

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* कम कार्बन उत्सर्जन: ये जीवाश्म ईंधन की तुलना में काफी कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है।
* हरित विकल्प: ये एक हरित और नवीकरणीय ऊर्जा का विकल्प प्रदान करते हैं।
* किफायती: कई बार ये पारंपरिक ईंधन की तुलना में किफायती भी होते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होता है।
* स्पष्ट पहचान: इन पंपों पर अक्सर ‘बायोडीजल’ या ‘बायोफ्यूल’ स्पष्ट तौर पर लिखा होता है, जिससे इनकी पहचान करना आसान होता है।

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यह पहल बिहार को स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण विकास के मानचित्र पर एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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