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मार्च, 2, 2026
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Bihar Bribery Case: बिहार शिक्षा विभाग में बड़ा घूसकांड, 57 लाख की योजना में 5 लाख रिश्वत लेते इंजीनियर गिरफ्तार

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Bihar Bribery Case: शिक्षा विभाग के गलियारों में भ्रष्टाचार का दीमक कुछ ऐसा पसरा है कि हर योजना से अपना हिस्सा निकाल लेता है। बेतिया में एक सहायक अभियंता को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा जाना, इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि विकास की हर ईंट पर कमीशन की काली छाया मंडरा रही है।

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Bihar Bribery Case: कैसे हुआ खुलासा और क्या है पूरा मामला?

बेतिया में शिक्षा विभाग से जुड़े एक बड़े घूसकांड का पर्दाफाश हुआ है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने सहायक अभियंता को 57 लाख रुपये की रिपेयरिंग योजना के बिल भुगतान के बदले 5 लाख रुपये की मोटी रकम रिश्वत के तौर पर लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब अभियंता रिश्वत की राशि प्राप्त कर रहे थे, जिसने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किस तरह सरकारी योजनाओं में घोटाला आम बात हो गई है और ईमानदारी अभी भी एक दुर्लभ गुण है।

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यह योजना शिक्षा विभाग से संबंधित थी, जिसमें मरम्मत कार्य के लिए 57 लाख रुपये का बजट निर्धारित था। आरोप है कि सहायक अभियंता इस कार्य के बिल भुगतान के लिए ठेकेदार से 10 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहा था। ठेकेदार की शिकायत पर निगरानी टीम ने जाल बिछाया और सहायक अभियंता को उनके कार्यालय से ही धर दबोचा। अधिकारियों के अनुसार, यह एक बड़ी कार्रवाई है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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जांच टीम ने सहायक अभियंता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब उनसे जुड़े अन्य मामलों और संपत्तियों की भी जांच की जाएगी ताकि इस पूरे रैकेट का खुलासा हो सके। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की चुनौती

यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि बिहार में सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बानगी भर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और निगरानी एजेंसियां इस तरह के भ्रष्ट अधिकारियों पर कितनी सख्ती से नकेल कस पाती है। सहायक अभियंता की गिरफ्तारी के बाद अब विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की संभावना है, जिसमें अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति न हो और जनता के पैसों का सही उपयोग हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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