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फ़रवरी, 11, 2026
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Bihar Budget Session: बिहार बजट सेशन में महिला रोजगार योजना पर गरमाई सियासत, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

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Bihar Budget Session: जहाँ उम्मीदों और घोषणाओं के फूल खिलते हैं, इस बार तीखी बहस के शूलों में उलझ गया। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना एक चिंगारी बनी और पूरा सदन वाद-विवाद के भंवर में फंस गया।

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बिहार बजट सेशन: महिला रोजगार योजना पर गरमाई सियासत, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

बिहार बजट सेशन में गूंजा महिला रोजगार का मुद्दा

बिहार विधानसभा के बजट सत्र का सातवां दिन किसी सियासी अखाड़े से कम नहीं था। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग इतनी तीखी हुई कि सदन की कार्यवाही हंगामे में बदल गई। मुद्दा सिर्फ एक सरकारी योजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बिहार के विकास मॉडल, सम्मानजनक रोजगार के अवसर और राज्य की सामाजिक-आर्थिक उन्नति की दिशा में सरकार के प्रयासों पर सीधा सवाल बन गया।

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विपक्ष ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कागजों पर दिखने वाली यह योजना जमीनी स्तर पर महिलाओं को पर्याप्त लाभ नहीं दे पा रही है, जिससे महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य अधूरा रह रहा है। उनका आरोप था कि यह केवल वोट बैंक की राजनीति है और युवाओं को सम्मानजनक रोजगार देने में सरकार विफल रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं, सत्ता पक्ष ने योजना को बिहार की महिलाओं के आर्थिक उत्थान की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। सत्ताधारी दल के नेताओं ने आंकड़ों के साथ यह साबित करने की कोशिश की कि योजना के माध्यम से लाखों महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे वे न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि समाज में भी उनकी भागीदारी बढ़ रही है।

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इस बहस ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या बिहार सही मायने में एक ऐसे मॉडल पर काम कर रहा है, जहाँ हर वर्ग को समान अवसर मिल सकें? क्या सरकार की नीतियां केवल घोषणाएं बनकर रह जाती हैं या उनका वास्तविक प्रभाव भी दिखता है? सदन में गरमाई यह बहस आम जनता के लिए कई सवाल खड़े कर रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस दौरान विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सिर्फ योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनका सही तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है।

योजना बनाम जमीनी हकीकत: आंकड़ों का खेल

सत्ता पक्ष ने योजना के तहत किए गए कार्यों और लाभार्थियों की संख्या का हवाला दिया, जबकि विपक्ष ने लाभार्थियों तक पहुंचने वाली कठिनाइयों और योजना के लाभ से वंचित रह गए लोगों की समस्याओं को उजागर किया। इस बात पर भी जोर दिया गया कि महिला रोजगार योजना बिहार बजट सेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का मामला नहीं है, बल्कि इससे पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच, यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। सरकार और विपक्ष दोनों के लिए यह एक ऐसा विषय है, जिस पर भविष्य में भी गरमागरम बहस जारी रहेगी। बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों की समीक्षा के लिए यह बहस एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है, ताकि योजनाओं को और अधिक जनहितैषी बनाया जा सके।

सदन में चली यह बहस केवल तात्कालिक राजनीतिक खींचतान नहीं थी, बल्कि यह बिहार के भविष्य और उसके विकास की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण सवालों को उजागर करती है। देखना होगा कि इस योजना का भविष्य क्या होता है और सरकार विपक्ष के उठाए गए सवालों का जवाब किस प्रकार देती है।

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