

Rural Development Bihar: बिहार के गांवों की तस्वीर अब बदलने वाली है, जहां खेत-खलिहानों की पगडंडियों पर अब विकास की नई इबारत लिखी जाएगी। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने और स्थानीय उत्पादों को एक नया मंच देने के लिए एक बड़ी योजना का खाका तैयार किया है। ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार’ और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत, प्रदेश में कुल 725 नए हाट और बाजार विकसित किए जाने हैं, जिनका क्रियान्वयन ग्रामीण विकास विभाग की देखरेख में होगा।
Rural Development Bihar का मास्टरप्लान: जानिए क्या होंगी सुविधाएं
विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 447 हाट और 278 बाजार बनाए जाएंगे। इन हाट-बाजारों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है ताकि विकास का काम चरणबद्ध तरीके से और व्यवस्थित रूप से हो सके। पहली श्रेणी में 20 से 49 डिसमिल भूमि पर 136 हाट और 73 बाजार बनेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। दूसरी श्रेणी में 50 से 99 डिसमिल के क्षेत्रफल में 125 हाट और 96 बाजारों का निर्माण होगा, जबकि तीसरी और सबसे बड़ी श्रेणी में एक एकड़ या उससे अधिक भूमि पर 186 हाट और 109 बाजार विकसित किए जाएंगे।
इन सभी बाजारों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। हर श्रेणी के बाजार में सुविधाओं का स्तर अलग-अलग होगा:
- पहली श्रेणी: शेड के साथ 5 चबूतरे, शौचालय-पेयजल, जीविका दीदियों के लिए 3 स्थाई दुकानें, एक मल्टी-पर्पस स्टोर और कचरा निपटान के लिए गार्बेज डिस्पोजल पिट।
- दूसरी श्रेणी: शेड के साथ 13 चबूतरे, शौचालय-पेयजल, जीविका दीदियों के लिए 4 स्थाई दुकानें, एक कार्यालय, एक मल्टी-पर्पस स्टोर और गार्बेज डिस्पोजल पिट।
- तीसरी श्रेणी: शेड के साथ 16 चबूतरे, शौचालय-पेयजल, जीविका दीदियों के लिए 6 स्थाई दुकानें, एक कार्यालय, दो मल्टी-पर्पस स्टोर और गार्बेज डिस्पोजल पिट।
ई-नाम से जुड़ेंगे बाजार, जीविका दीदियों को मिलेगी प्राथमिकता
इन हाट-बाजारों के विकास का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों और स्थानीय कारीगरों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना भी है। कृषि विपणन निदेशालय इन सभी विकसित बाजारों को राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) पोर्टल से जोड़ने का काम करेगा। इससे किसानों को अपने उत्पादों की बेहतर कीमत मिल सकेगी। एक बार बाजार विकसित हो जाने के बाद, उन्हें संबंधित विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन भी किया जाएगा।
इस पहल से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि महिला सशक्तीकरण को भी नया आयाम मिलेगा। जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी इन बाजारों में निर्मित स्थाई दुकानों और ‘दीदी की रसोई’ का आवंटन तय करेंगे, जिससे महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इन बाजारों के रख-रखाव और संचालन की जिम्मेदारी स्वामित्व वाले विभाग की होगी, जिससे इनकी दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। किसानों और महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों का विपणन आसान होगा और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही मार्केटिंग की सुविधा मिल जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
क्या कहते हैं ग्रामीण विकास मंत्री
इस योजना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, “बिहार सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हाट-बाजारों का विकास कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा और इसका छोटे किसानों और व्यापारियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा।” उनके अनुसार, यह कदम राज्य में रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।



