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Bihar IAS Transfer: बिहार ब्यूरोक्रेसी में भूचाल! नीतीश के करीबी IAS-IPS केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर, बदलेंगे समीकरण?

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बिहार ब्यूरोक्रेसी: बिहार की राजनीति में मचे घमासान के बीच अब प्रशासनिक गलियारों में भी बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। नई सरकार के गठन से ठीक पहले, केंद्र सरकार ने बिहार कैडर के कई प्रभावशाली IAS और IPS अधिकारियों को दिल्ली बुला लिया है, जिनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद भरोसेमंद अफसर भी शामिल हैं।Bihar IAS Transfer: नई सरकार के गठन से पहले बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, CM के करीबी समेत कई अधिकारी दिल्ली बुलाए गए

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Bihar IAS Transfer: बिहार में नई सरकार के शपथ ग्रहण से ठीक पहले नीतीश कुमार की सरकार ने बड़े प्रशासनिक बदलाव को अंजाम दिया है। केंद्र सरकार के आदेश पर बिहार कैडर के कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली बुलाया गया है। इस अप्रत्याशित फेरबदल ने राज्य की ब्यूरोक्रेसी में जबरदस्त हलचल मचा दी है।

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केंद्र की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े कई प्रभावी अधिकारियों के नाम इस फेहरिस्त में शामिल हैं। मुख्यमंत्री के सचिव रहे अनुपम कुमार को ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (ज्वाइंट सेक्रेटरी) बनाया गया है। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी और विश्वसनीय अधिकारियों में गिना जाता था।

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बिहार IAS Transfer: वरिष्ठ अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वंदना प्रेयसी को उर्वरक विभाग में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी राकेश राठी को केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, प्रतिमा एस. वर्मा को जनजातीय कार्य मंत्रालय में आयुक्त बनाया गया है। अनुपम कुमार और प्रतिमा एस. वर्मा को एक साथ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की मंजूरी मिली है, जिससे इनकी तत्काल रवानगी तय मानी जा रही है।

आईएएस अधिकारी सरवनन एम को अंतरिक्ष विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात किया गया है। इन महत्वपूर्ण नियुक्तियों के बाद, राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को रिलीव करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह Bihar IAS Transfer राज्य के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव लाएगी।

सरकार गठन से पहले हलचल क्यों?

यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय में हुआ है, जब बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे और नई सरकार के शपथ ग्रहण से ठीक पहले हुए इन ट्रांसफर-पोस्टिंग ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खूब ध्यान खींचा है। इसका असर आगामी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी दिख सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

नीतीश के सबसे भरोसेमंद अधिकारी दिल्ली रवाना

केंद्र सरकार द्वारा जारी पहली सूची में उन नामों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे खास अधिकारियों में गिना जाता है। इस प्रशासनिक फेरबदल में सबसे चौंकाने वाला नाम 2003 बैच के IAS अधिकारी अनुपम कुमार का है। अनुपम कुमार मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में नीतीश कुमार के सबसे विश्वसनीय रणनीतिकारों में से एक रहे हैं। उन्हें अब केंद्र में ऊर्जा मंत्रालय का संयुक्त सचिव बनाया गया है। उनके साथ ही उनकी पत्नी प्रतिमा एस. वर्मा को भी जनजातीय कार्य मंत्रालय में कमिश्नर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इस ‘पावर कपल’ का एक साथ दिल्ली जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिहार सचिवालय का पुराना दबदबा अब पूरी तरह बदलने वाला है।

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बिहार ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल और नई चुनौतियां

सीनियर IPS राकेश राठी को केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है, जहाँ वे सीधे तौर पर देश की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करेंगे। वंदना प्रेयसी को फर्टिलाइजर विभाग और श्रवनन एम. को अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण विभाग में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी मिली है। जानकारों का मानना है कि नई सरकार के गठन से ठीक पहले इन अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राज्य से जाना भविष्य की नई प्रशासनिक कार्यशैली का हिस्सा है। पटना के मुख्य सचिवालय में इस वक्त सन्नाटा पसरा हुआ है और हर अधिकारी की नजर आने वाली दूसरी सूची पर टिकी है। चर्चा है कि जल्द ही आधा दर्जन और बड़े नामों को दिल्ली भेजा जा सकता है। राज्य सरकार ने पहले ही इन अधिकारियों को रिलीव करने की फाइल पर अपनी मुहर लगा दी थी।

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नई सरकार आने से पहले पुराने तंत्र को बदलकर नए अधिकारियों को मौका देना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। अब देखना यह होगा कि कल शपथ लेने वाली नई सरकार किन नए चेहरों के साथ बिहार की कमान संभालती है। यह बदलाव निश्चित रूप से बिहार ब्यूरोक्रेसी के भविष्य को नया आकार देगा।

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