Bihar Bus Stand Food: यात्रियों के सफर को अब स्वादिष्ट और सेहतमंद बनाएगी एक नई पहल, जहां स्वाद और सुविधा का संगम होगा। बासी और महंगे भोजन की मजबूरी अब अतीत की बात होगी, क्योंकि बिहार के बस डिपो पर जल्द ही घर जैसे पौष्टिक और किफायती व्यंजन उपलब्ध होंगे।
बिहार बस स्टैंड फ़ूड: अब बस अड्डे पर भी घर जैसा स्वादिष्ट खाना, जीविका दीदियों का नया कमाल!
बिहार बस स्टैंड फ़ूड: यात्रियों की बढ़ेगी सुविधा, मिलेगा सस्ता और पौष्टिक आहार
लंबी यात्राएं अक्सर थकान भरी होती हैं, और ऐसे में सफर से पहले या बाद में गुणवत्तापूर्ण भोजन की तलाश एक चुनौती बन जाती है। आमतौर पर बस स्टैंड पर मिलने वाला खाना या तो महंगा होता है या उसकी गुणवत्ता सवालों के घेरे में रहती है। लेकिन अब बिहार के प्रमुख बस डिपो पर यह तस्वीर बदलने वाली है। राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत, यात्रियों को थाली में परोसा जाएगा सस्ता, साफ और पौष्टिक भोजन। यह पहल न केवल यात्रियों को सुविधा देगी, बल्कि स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी। यह एक ऐसा कदम है जो बिहार की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह पूरी परियोजना जीविका दीदियों द्वारा संचालित ‘जीविका दीदी रसोई’ के माध्यम से क्रियान्वित की जाएगी। यह पहल जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जीविका दीदी रसोई पहले से ही कई सरकारी कार्यालयों और अस्पतालों में सफलतापूर्वक चलाई जा रही है, जहां वे स्वच्छ और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराकर अपनी पहचान बना चुकी हैं। अब इस मॉडल को बस डिपो तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जीविका दीदी रसोई: आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम
जीविका कार्यक्रम बिहार में महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। ‘दीदी की रसोई’ जैसी पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करती है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान भी दिलाती है। बस डिपो पर उनकी रसोई खुलने से उनकी आय में वृद्धि होगी और उन्हें बड़े पैमाने पर ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलेगा। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, इन रसोइयों में आलू-सत्तू पराठा जैसे स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनकी कीमत लगभग 30 रुपये होगी। मेन्यू में दाल-चावल, सब्जी, रोटी और अन्य मौसमी व्यंजन भी शामिल हो सकते हैं, जो स्थानीय स्वाद और पोषण को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता से समझौता किए बिना भोजन को किफायती बनाए रखना है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यात्रियों को घर जैसा स्वादिष्ट और स्वच्छ भोजन मिले, जो उनकी यात्रा को और भी सुखद बना सके। यह पहल दिखाती है कि कैसे छोटे बदलाव बड़े प्रभाव डाल सकते हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इन रसोइयों में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जीविका दीदियों को भोजन तैयार करने और परोसने के लिए उचित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे उच्चतम गुणवत्ता बनाए रख सकें। यह पहल न केवल यात्रियों के लिए फायदेमंद होगी, बल्कि बस डिपो के आसपास के इलाकों में भी एक सकारात्मक बदलाव लाएगी। अब यात्री बिना किसी चिंता के अपनी यात्रा जारी रख सकेंगे, क्योंकि उन्हें पता होगा कि बस डिपो पर एक भरोसेमंद और स्वादिष्ट भोजन का विकल्प मौजूद है। यह एक सराहनीय प्रयास है जो जनहित में मील का पत्थर साबित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




