
बिहार कैबिनेट विस्तार: बिहार की सियासत में हलचल मचाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से अटके कैबिनेट विस्तार का इंतजार अब खत्म होता दिख रहा है। सोमवार को दिल्ली में हुई एक हाई-लेवल बैठक ने कई अटकलों को जन्म दिया है, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चिराग पासवान से मुलाकात की।
सोमवार को नई दिल्ली में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान से उनके आवास पर मुलाकात की। आधिकारिक तौर पर इस बैठक को बिहार के विकास, महिला सशक्तिकरण और राज्य की आगामी उन्नति के रोडमैप पर केंद्रित बताया गया। लेकिन, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि दोनों नेताओं ने राज्य में काफी समय से लंबित बिहार कैबिनेट विस्तार और एनडीए के भीतर सीटों के तालमेल पर विस्तार से बातचीत की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पटना से लेकर दिल्ली तक सत्ता पक्ष के भीतर सांगठनिक बदलावों की सुगबुगाहट तेज है।
बैठक का छिपा एजेंडा: कैबिनेट विस्तार और NDA समन्वय
आधिकारिक तौर पर सम्राट चौधरी ने इस मुलाकात को बिहार के समग्र विकास से जुड़ी एक सार्थक चर्चा करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि चिराग पासवान के साथ राज्य की उन्नति के विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए गए। जानकारों का मानना है कि बिहार में मंत्रियों के कई पद खाली होने के कारण विभागों के कामकाज पर असर पड़ रहा है। ऐसे में दोनों बड़े नेताओं का एक साथ बैठना केवल शिष्टाचार भेंट नहीं हो सकता। माना जा रहा है कि चिराग पासवान की पार्टी की ओर से कैबिनेट में शामिल होने वाले संभावित चेहरों पर भी इस दौरान सहमति बनाने की कोशिश की गई है।
एनडीए सरकार के भीतर जेडीयू, बीजेपी और लोजपा (आर) के बीच बेहतर तालमेल बिठाना इस समय सबसे बड़ी चुनौती है। सम्राट चौधरी और चिराग पासवान के बीच की केमिस्ट्री हमेशा से चर्चा में रही है। इस बैठक में युवाओं के लिए रोजगार और राज्य की नई योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी चर्चा हुई। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों से पहले संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने की एक कवायद के रूप में देख रहे हैं। यदि कैबिनेट विस्तार जल्द होता है, तो इसमें नए और युवा चेहरों को प्राथमिकता दी जा सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कैबिनेट विस्तार में देरी की वजहें और संभावित चेहरे
बिहार में कैबिनेट विस्तार की तारीखें कई बार टल चुकी हैं। मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और नए चेहरों के चयन को लेकर एनडीए के घटक दलों के बीच गहन मंथन चल रहा है। चिराग पासवान की पार्टी वर्तमान में केंद्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, इसलिए बिहार कैबिनेट में उनके कोटे से किसे जगह मिलेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
सम्राट चौधरी भी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के नाते यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि विस्तार के बाद किसी भी प्रकार का असंतोष न पैदा हो। दिल्ली की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि बहुत जल्द पटना में राजभवन में हलचल देखने को मिल सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
‘विकसित बिहार’ का विजन और आगामी रणनीति
इस मुलाकात के दौरान केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि ‘विकसित बिहार’ के लक्ष्य पर भी बात हुई। चिराग पासवान ने हमेशा से ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का विजन सामने रखा है। सम्राट चौधरी ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करते हुए केंद्र से मिलने वाली सहायता और साझा परियोजनाओं पर चर्चा की। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली की इस ‘सार्थक चर्चा’ का असर पटना में कितनी जल्दी दिखाई देता है और इसका प्रभाव बिहार कैबिनेट विस्तार पर क्या होता है।





