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Bihar Census : जनगणना से पहले बिहार सरकार का बड़ा फैसला, अधिकारियों-कर्मियों के तबादलों पर लगी रोक

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Bihar Census : बिहार में होने वाली जनगणना की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं, और राज्य सरकार इस प्रक्रिया को लेकर बेहद गंभीर है। एक बड़ा फैसला लेते हुए, सरकार ने जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगा दी है ताकि यह महत्वपूर्ण अभियान सुचारू रूप से संपन्न हो सके। सरकार का मानना है कि बार-बार होने वाले तबादलों से जनगणना जैसे बड़े अभियान की निरंतरता और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, इसलिए इसे स्थिर प्रशासनिक ढांचे के साथ पूरा करना जरूरी है।

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Bihar Census : क्यों लगाई गई तबादलों पर रोक?

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव-सह-राज्य जनगणना समन्वयक सी.के. अनिल ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलाधिकारियों को आधिकारिक पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा गया है कि जनगणना 2027 की तैयारियां अब अंतिम चरण में प्रवेश कर रही हैं और प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों व कर्मियों की नियुक्ति तथा प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। ऐसे में यदि इस कार्य में लगे कर्मियों का स्थानांतरण होता है तो पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना, दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

राज्य सरकार की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक, इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल जनगणना माध्यम से कराई जाएगी, जो देश की जनगणना प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। डिजिटल सिस्टम के जरिए डेटा संग्रहण, सत्यापन और विश्लेषण को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की योजना है। इसके लिए जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

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निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी:

  • पहला चरण: मकान सूचीकरण और भवन गणना (अप्रैल 2026 से सितंबर 2026)
    इस चरण में हर घर, भवन और आवासीय इकाइयों का विस्तृत विवरण एकत्र किया जाएगा।
  • दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)
    यह मुख्य चरण होगा, जिसमें प्रत्येक नागरिक से संबंधित सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी दर्ज की जाएगी।
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कानूनी अनिवार्यता और प्रशासनिक समन्वय

राज्य सरकार के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना एक वैधानिक और समयबद्ध प्रक्रिया है, जो जनगणना अधिनियम 1948 (Census Act 1948) और जनगणना नियम 1990 (Census Rules 1990) के प्रावधानों के तहत संचालित होती है। इस कानून के तहत जनगणना से जुड़े कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य होता है। इसलिए, केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है कि जनगणना से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मियों का स्थानांतरण 31 मार्च 2027 तक नहीं किया जाएगा।

आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बिहार जैसे बड़े राज्य में जनगणना का कार्य लाखों घरों और करोड़ों लोगों तक पहुंचता है। ऐसे में स्थिर प्रशासनिक व्यवस्था और प्रशिक्षित कर्मियों की निरंतर मौजूदगी से पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि डिजिटल तकनीक और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के जरिए Bihar Census 2027 को पहले से अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जाए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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