

North Koel Reservoir Project: बिहार की सूखी धरती की प्यास बुझाने वाली परियोजनाओं पर अब सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट कर दिया है कि काम में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समय पर लक्ष्य पूरा करना ही होगा।
पटना: बिहार के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्य की दो बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को लेकर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य फोकस ‘नार्थ कोयल जलाशय परियोजना’ और ‘मंडई वीयर परियोजना’ की प्रगति पर रहा, जिसका विस्तृत ब्यौरा जल संसाधन विभाग ने प्रस्तुत किया। मुख्य सचिव ने आगामी भीषण गर्मी और मानसून सत्र का हवाला देते हुए अधिकारियों और ठेकेदारों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी हाल में तय समय-सीमा के भीतर काम पूरा हो जाना चाहिए।
North Koel Reservoir Project: गया-औरंगाबाद के लिए क्यों है यह जीवनदायिनी?
नार्थ कोयल जलाशय परियोजना को दक्षिण बिहार के सूखाग्रस्त जिलों, विशेषकर औरंगाबाद और गया के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है। कुल 162 किलोमीटर लंबी इस नहर प्रणाली के लिए दोनों जिलों में लगभग 90% भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा कर लिया गया है। मुख्य सचिव ने बाकी बचे काम को पूरा करने के लिए एक सख्त डेडलाइन तय कर दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने निर्देश दिया कि औरंगाबाद में 30 अप्रैल तक और गया में मई माह के अंत तक भूमि अधिग्रहण का कार्य अनिवार्य रूप से संपन्न हो जाना चाहिए। बैठक में मौजूद वैपकोस (WAPCOS) के प्रतिनिधियों ने भी आश्वासन दिया कि मार्च के अंत तक परियोजना का 60% काम पूरा कर लिया जाएगा।

समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ संवेदक एजेंसियों के काम की गति बेहद धीमी है, जिससे परियोजना में देरी हो सकती है। पैकेज 8, 9, 10 और 11 पर काम कर रहीं MSR कंस्ट्रक्शन और नियति कंस्ट्रक्शन को मुख्य सचिव ने कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मैनपावर और मशीनरी की संख्या बढ़ाकर काम को गति दें, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मुख्यालय स्तर के वरीय अधिकारियों को भी नियमित रूप से स्थल निरीक्षण कर निगरानी सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।
मंडई वीयर परियोजना की प्रगति संतोषजनक
बैठक में फल्गु नदी पर बन रही मंडई वीयर परियोजना की भी समीक्षा की गई, जिसकी प्रगति संतोषजनक पाई गई। यह परियोजना जहानाबाद, नालंदा और पटना जिले के क्रमशः मोदनगंज, एकंगरसराय और धनरूआ प्रखंडों के लिए सिंचाई का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनेगी। जहानाबाद के जिलाधिकारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बताया कि अब तक 73% भौतिक कार्य पूर्ण हो चुका है और साईट पर लेबर, भुगतान या मशीनरी से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। रैयतों के मुआवजे का भुगतान भी सुचारू रूप से चल रहा है, जिससे कार्य में कोई बाधा नहीं आ रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
इस अहम समीक्षा बैठक में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष मल्ल, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी, और वित्त विभाग के सचिव (संसाधन) जय सिंह समेत गया, औरंगाबाद और जहानाबाद के जिलाधिकारी भी शामिल हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। संबंधित ठेकेदारों और वैपकोस के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी इस दौरान मौजूद रहे।




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