



अक्सर देखा गया है कि समाज का पहिया घुमाने वाली महिलाएं जब अपने घर-परिवार की देखभाल का बीड़ा उठाती हैं, तो उनके पेशेवर जीवन में संतुलन साधना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। बिहार की धरती पर अब ऐसी ही एक बड़ी चुनौती का समाधान होता दिख रहा है, जहां मातृत्व और कर्तव्य के बीच सामंजस्य बिठाने की कवायद तेज हो गई है। Bihar Child Care Leave: बिहार विधानसभा के चालू सत्र में महिला कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा एक अहम मुद्दा सदन के केंद्र में आ गया है। शिक्षा विभाग में कार्यरत महिलाओं को 730 दिनों का शिशु देखभाल अवकाश देने की लंबे समय से लंबित मांग पर आखिरकार सरकार को जवाब देना पड़ा।
शिक्षा विभाग में Bihar Child Care Leave की वर्षों पुरानी मांग
बिहार विधानसभा के मौजूदा सत्र में महिला कर्मचारियों के हितों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल जोर-शोर से उठाया गया है। यह मुद्दा विशेष रूप से शिक्षा विभाग में कार्यरत महिला शिक्षकों और अन्य महिला कर्मियों के लिए 730 दिनों के शिशु देखभाल अवकाश (Child Care Leave) से संबंधित है। लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर अब सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा है। यह एक ऐसा विषय है जो हजारों महिला कर्मचारी अधिकार से जुड़ा है और उनके जीवन पर सीधा प्रभाव डालता है।
सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय की ओर से एक जानकारी साझा की गई है, जिसमें इस संबंध में उठाए गए कदमों का उल्लेख है। दरअसल, राज्य सरकार ने पूर्व में ही यह अवकाश देने की सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, इसके क्रियान्वयन में देरी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण यह मामला विधानसभा में फिर से उठाना पड़ा।
यह अवकाश उन महिला कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिन्हें अपने छोटे बच्चों की देखभाल के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। यह न केवल उनके बच्चों के बेहतर पालन-पोषण में मदद करेगा, बल्कि महिला कर्मचारियों को अपने पेशेवर दायित्वों के साथ मातृत्व सुख का भी अनुभव करने का अवसर प्रदान करेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
इस मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा इस बात का संकेत है कि सरकार महिला कर्मियों की समस्याओं के प्रति गंभीर है। उम्मीद है कि जल्द ही इस संबंध में कोई ठोस निर्णय सामने आएगा, जिससे हजारों महिला शिक्षकों और कर्मियों को राहत मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्या है शिशु देखभाल अवकाश और इसकी आवश्यकता?
शिशु देखभाल अवकाश, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, महिला कर्मचारियों को उनके बच्चों की देखभाल के लिए दिया जाने वाला विशेष अवकाश है। यह बच्चों के 18 वर्ष की आयु पूरी करने तक लिया जा सकता है, हालांकि यह कुछ शर्तों के अधीन होता है। आमतौर पर, यह अवकाश बच्चों की बीमारी, परीक्षा या अन्य महत्वपूर्ण आवश्यकताओं के दौरान माँ को उनके साथ रहने का अवसर प्रदान करता है।
शिक्षा विभाग में काम करने वाली हजारों महिलाएं अक्सर अपने बच्चों की देखभाल और अपने शिक्षण कार्य के बीच संतुलन बिठाने में चुनौतियों का सामना करती हैं। इस अवकाश के प्रावधान से उन्हें मानसिक राहत मिलेगी और वे अपने कार्यस्थल पर भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगी। यह एक प्रगतिशील कदम होगा जो कार्यस्थल पर महिला कर्मचारी अधिकार को और मजबूत करेगा।
सरकार द्वारा इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने के बाद अब सभी की निगाहें इसके अंतिम अनुमोदन और कार्यान्वयन पर टिकी हैं। महिला कर्मचारियों को उम्मीद है कि यह निर्णय जल्द ही हकीकत में बदलेगा, जिससे उनके और उनके परिवारों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


