
Bihar Politics: बिहार की सियासी बिसात पर मोहरों का खेल एक बार फिर तेज हो गया है। कभी दोस्त तो कभी दुश्मन की भूमिका में दिखने वाले नेता अचानक पाला बदलते नजर आ रहे हैं, जिससे सत्ता के गलियारों में हलचल मच गई है।
बिहार पॉलिटिक्स में गरमाई अटकलों का बाजार
बिहार की राजनीतिक फिजां में अचानक गर्माहट आ गई है। रविवार को कांग्रेस के बागी विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने बिहार सरकार में कद्दावर मंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी के पटना स्थित आवास पर पहुंचकर सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। यह मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक समीकरण छिपा है, इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस गुप्त मुलाकात ने राज्य की मौजूदा सियासी हलचल को और तेज कर दिया है। राजनीतिक पंडित इसे ‘फ्लोर क्रॉसिंग’ से जोड़कर देख रहे हैं, खासकर तब जब विधानसभा में शक्ति प्रदर्शन का समय नजदीक आ रहा है।
पिछले कुछ समय से बिहार की राजनीति में कई अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिले हैं, जिनमें नेताओं का दल-बदल एक आम बात हो गई है। ऐसे में सुरेंद्र कुशवाहा और अशोक चौधरी की यह मुलाकात कई मायनों में महत्वपूर्ण हो जाती है। कांग्रेस खेमे में जहां इस घटनाक्रम से बेचैनी देखी जा रही है, वहीं जदयू इसे सामान्य भेंट बताकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में है। इस सियासी हलचल के बीच, प्रदेश की जनता भी असमंजस में है कि आखिर चल क्या रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस मामले में जदयू के एक करीबी सूत्र ने बताया कि ऐसी मुलाक़ातें आम हैं और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा का ट्रैक रिकॉर्ड भी बताता है कि वे अपने राजनीतिक फैसलों को लेकर मुखर रहे हैं। पहले भी उनके बागी तेवर देखने को मिले हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। इस बार, मंत्री के घर अचानक पहुंचना, भले ही अनौपचारिक कहा जाए, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ निकाले जाना स्वाभाविक है।
महागठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बिहार में महागठबंधन की सरकार का भविष्य अधर में लटका हुआ दिख रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। कांग्रेस विधायक का सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता से मिलना, महागठबंधन में दरार की अटकलों को और हवा दे रहा है। क्या यह किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है, या सिर्फ एक विधायक की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिणाम? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। बिहार की राजनीति में हर दिन नए समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





