
निजी प्रैक्टिस: बिहार में सरकारी डॉक्टरों और सरकार के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। पटना में हुई एक अहम बैठक में डॉक्टरों ने दो टूक कह दिया कि निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह से रोक लगाना व्यावहारिक नहीं है और वे इसे ‘एकतरफा’ फैसला मानते हैं। सरकार अगर नहीं झुकी तो राज्यव्यापी डॉक्टरों का आंदोलन तय है।
पटना के IMA भवन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) और विश्व आयुर्वेद परिषद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध से न केवल डॉक्टरों की आय प्रभावित होगी, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। डॉक्टरों का तर्क है कि यह कदम उनके अधिकारों का हनन है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।
निजी प्रैक्टिस को लेकर डॉक्टरों के कड़े तेवर
डॉक्टरों ने सरकार के प्रस्ताव को एकतरफा बताते हुए कहा कि निजी प्रैक्टिस को अनिवार्य रूप से बंद करने के बजाय इसे ‘वैकल्पिक’ रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि सरकारी सेवा में आने वाले डॉक्टरों या मेडिकल शिक्षकों पर किसी भी तरह का दबाव बनाना अनुचित है। आइएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह और भासा के अध्यक्ष डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि बिना सुविधाओं में सुधार किए ऐसी पाबंदी लगाना न्यायसंगत नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
भासा का पांच सूत्रीय अल्टीमेटम और शर्तें
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने इस विवाद को सुलझाने के लिए सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:
- यदि नीति लागू करनी है, तो इसे केवल नई नियुक्तियों पर लागू किया जाए, वर्तमान में कार्यरत डॉक्टरों पर नहीं।
- डॉक्टरों के वेतन और भत्तों (NPA) में भारी वृद्धि की जाए।
- कार्य-परिस्थितियों में सुधार किया जाए।
- अस्पतालों की आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाए।
- सभी अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बिना कोई फैसला न लिया जाए, अन्यथा डॉक्टरों का आंदोलन होगा।
इस मुद्दे पर अब आयुर्वेद और आयुष डॉक्टर भी सामने आ गए हैं। विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. शिवादित्य ठाकुर ने कहा कि एलोपैथ और आयुर्वेद चिकित्सकों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से अपने संकल्प में संशोधन कर आयुर्वेद चिकित्सकों के हितों का भी ध्यान रखने की मांग की। डॉक्टरों का मानना है कि यदि सरकार बिना किसी ठोस विकल्प और प्रोत्साहन के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाती है, तो राज्य के कुशल डॉक्टर बिहार से पलायन कर सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।







