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फ़रवरी, 11, 2026
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Bihar Drug Abuse: बिहार में नशाखोरी पर सियासी संग्राम: बजट सत्र में उठा बिहार ड्रग एब्यूज़ का मुद्दा

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Bihar Drug Abuse: बिहार की धरती पर नशे का साया गहराता जा रहा है, और अब यह सिर्फ शराब तक सीमित नहीं। सूखे नशे का बढ़ता चलन एक ऐसी खामोश महामारी है जो युवा पीढ़ी को लील रही है।

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Bihar Drug Abuse: बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान, राज्य में युवाओं और बच्चों के बीच बढ़ती नशाखोरी का गंभीर मुद्दा केंद्र में रहा। इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान, सरकार ने पहली बार यह स्वीकार किया कि पूर्ण शराबबंदी के बावजूद, सूखे नशे, जैसे गांजा, चरस, ब्राउन शुगर और टैबलेट्स का प्रचलन एक विकराल सामाजिक चुनौती के रूप में उभरा है। सदन के भीतर उठी गंभीर आवाजों ने इस चिंता को और भी गहरा कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज के भविष्य से जुड़ा एक अहम सवाल है।

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आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्यों ने इस मुद्दे पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उनका मानना था कि नशे का यह जाल तेजी से ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में फैल रहा है, जिससे परिवारों और समाज की नींव कमजोर हो रही है।

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बिहार ड्रग एब्यूज़: विधान परिषद में चिंता की लहर

सरकार की ओर से यह स्वीकारोक्ति अपने आप में महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि राज्य प्रशासन अब इस उभरती हुई समस्या की गंभीरता को समझने लगा है। सदस्यों ने विशेष रूप से यह उजागर किया कि स्कूल-कॉलेज के छात्र और किशोर वर्ग इस नशे की गिरफ्त में आसानी से फंस रहे हैं। यह स्थिति न केवल उनके स्वास्थ्य को खराब कर रही है, बल्कि उनके भविष्य को भी अंधकारमय बना रही है। इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि एक प्रभावी नशा मुक्ति अभियान चलाया जा सके।

विधायकों ने सरकार से आग्रह किया कि इस खतरे को रोकने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की जाए। इसमें नशे के स्रोतों पर नकेल कसने, जागरूकता कार्यक्रम चलाने और नशा करने वालों के लिए उचित पुनर्वास की व्यवस्था करने जैसे कदम शामिल होने चाहिए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

सामाजिक ताने-बाने पर प्रहार

नशाखोरी केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करती है। अपराधों में वृद्धि, पारिवारिक कलह और युवा शक्ति का ह्रास इसके कुछ प्रमुख दुष्परिणाम हैं। यह स्थिति आर्थिक रूप से भी राज्य को कमजोर कर रही है, क्योंकि नशे पर खर्च होने वाला धन उत्पादक कार्यों में नहीं लग पाता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

विधान परिषद में हुई इस बहस ने यह उम्मीद जगाई है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी। यह सिर्फ कानून का विषय नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभियान है जिसमें सरकार, समाज और परिवार सबको मिलकर काम करना होगा।

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समाधान की ओर कदम

यह समझना आवश्यक है कि सिर्फ कानूनी प्रावधानों से इस समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के समन्वय की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करना होगा कि यह मुद्दा केवल बजट सत्र तक सीमित न रहे, बल्कि इस पर निरंतर कार्य जारी रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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