
बिहार शिक्षा समाचार: बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को अब और बेहतर मिड-डे मील मिल पाएगा! शिक्षा विभाग ने राज्य के 71 हजार से ज़्यादा प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत रसोइयों और सहायकों की नियुक्ति के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब इन पदों को बच्चों की संख्या के आधार पर भरा जाएगा और रिक्तियों को एक महीने के भीतर भरने का आदेश जारी किया गया है।
बच्चों की संख्या के आधार पर नियुक्ति का नया नियम
बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य के करीब 71 हजार प्रारंभिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) के तहत रसोइयों और सहायकों की नियुक्ति के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज़ कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब बच्चों की वास्तविक संख्या के आधार पर ही रसोइयों और सहायकों की नियुक्ति की जाएगी। मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र ने सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रत्येक विद्यालय में बच्चों की संख्या को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर जल्द से जल्द अपलोड किया जाए। इसी डेटा के आधार पर स्वीकृत पदों की संख्या तय होगी और रिक्तियों को एक माह के भीतर भरा जाएगा।
लापरवाही पर होगी विभागीय कार्रवाई
इस नए निर्देश के मुताबिक, यदि किसी विद्यालय में रसोइया या सहायक का पद एक माह से अधिक समय तक रिक्त रहता है, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में जिला शिक्षा कार्यक्रम पदाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी सूरत में विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलने में देरी न हो।
नए नियम और बिहार शिक्षा समाचार पर इसका प्रभाव
पूर्व में, रसोइया और सहायक की संख्या का निर्धारण 2013 की अनुदेशिका के तहत कुल नामांकित छात्र-छात्राओं के 85 प्रतिशत के आधार पर किया जाता था, जिसे बाद में संशोधित करके 75 प्रतिशत कर दिया गया था। लेकिन अब, अद्यतन नामांकन (वर्तमान में दर्ज छात्रों की संख्या) के आधार पर ही इन पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जिससे जमीनी हकीकत के हिसाब से मैनपावर उपलब्ध हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
विभागीय निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रसोइया या सहायक के सेवानिवृत्त होने, मृत्यु होने या इस्तीफा देने की स्थिति में पुराने रिक्त पद को आधार नहीं माना जाएगा। इसके बजाय, विद्यालय में वर्तमान नामांकन और निर्धारित मानकों के अनुसार रिक्तियों की गणना की जाएगी और एक माह के भीतर नए रसोइया और सहायक की नियुक्ति सुनिश्चित करनी होगी। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य यह है कि किसी भी स्थिति में मध्याह्न भोजन योजना एक दिन के लिए भी बाधित न हो और बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके। यह कदम बिहार शिक्षा समाचार में एक महत्वपूर्ण अपडेट है, जो राज्य के बच्चों के पोषण और शिक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।
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