



Bihar Electricity Bill: समय का पहिया एक बार फिर आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने को तैयार है। बिजली की चमक अब और महंगी हो सकती है, क्योंकि आगामी 1 अप्रैल 2026 से बिहार में बिजली का बोझ बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
Bihar Electricity Bill: अप्रैल 2026 से बढ़ेगा बिजली का बोझ, उपभोक्ताओं पर 3200 करोड़ का झटका!
Bihar Electricity Bill: कंपनियों ने मांगी 3200 करोड़ की बकाया वसूली
दरअसल, राज्य की विद्युत कंपनियों ने बिहार विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष एक बड़ी गुहार लगाई है। कंपनियों की मांग है कि उन्हें उपभोक्ताओं से 3200 करोड़ रुपये के पुराने बकाए की वसूली की अनुमति दी जाए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो इसका सीधा असर बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और उन्हें 1 अप्रैल 2026 से बढ़ी हुई बिजली की दरें झेलनी पड़ सकती हैं।
इस संभावित वृद्धि के पीछे मुख्य कारण बिजली कंपनियों का पुराना बकाया है, जिसकी वसूली के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं। आयोग को भेजी गई याचिका में कंपनियों ने विस्तार से अपनी वित्तीय स्थिति और बकाया राशि का ब्योरा प्रस्तुत किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब आम जनता पहले से ही महंगाई की मार से जूझ रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जानकारों का मानना है कि यदि आयोग कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो प्रदेश में बिजली महंगी होना तय है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसका असर घरों के बजट से लेकर छोटे-मोटे उद्योगों तक पर दिखेगा। उपभोक्ता संगठनों ने इस कदम का विरोध करने की तैयारी कर ली है, क्योंकि उनका तर्क है कि इसका बोझ आम जनता पर डालना अनुचित है।
आगे क्या होगा: आयोग का फैसला और उपभोक्ताओं पर असर
बिहार विद्युत विनियामक आयोग अब इस याचिका पर विचार-विमर्श करेगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और सभी पहलुओं पर गहन अध्ययन के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह प्रक्रिया आमतौर पर कुछ समय लेती है, लेकिन उपभोक्ताओं की निगाहें इस फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि आयोग पुरानी बकाया राशि की वसूली की अनुमति देता है, तो इसे नई बिजली की दरें निर्धारित करते समय समायोजित किया जा सकता है, जिससे बिलों में वृद्धि निश्चित है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस फैसले का दूरगामी परिणाम बिहार की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जीवनशैली पर पड़ना तय है। सरकार और आयोग को इस मामले में संवेदनशील रुख अपनाने की उम्मीद है ताकि उपभोक्ताओं पर बेवजह का वित्तीय दबाव न पड़े।


