
Bihar Electricity Tariff पर आयोग का बड़ा फैसला
बिहार में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। राज्य विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने बिजली वितरण कंपनियों के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें बिजली की दरों में वृद्धि की मांग की गई थी। बुधवार को आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिससे प्रदेश के लगभग 27 लाख उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है। इस फैसले के अनुसार, 1 अप्रैल से राज्य में बिजली की पुरानी दरें ही प्रभावी रहेंगी और किसी भी प्रकार की कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बिजली कंपनियां पहले से ही मुनाफे में चल रही हैं, ऐसे में आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और वित्तीय आंकड़ों के गहन विश्लेषण के बाद यह निर्णय लिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस सुनवाई के दौरान आयोग के सदस्य अरुण कुमार सिन्हा और परशुराम सिंह यादव भी मौजूद रहे।
किस उपभोक्ता को मिलेगी कितनी राहत?
इस फैसले से न केवल दरों में वृद्धि रुकी है, बल्कि कुछ श्रेणियों में उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर राहत भी मिली है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अब अलग-अलग दरों की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है, जिससे खासकर शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ा फायदा होगा।
- शहरी घरेलू उपभोक्ता: इन्हें प्रति यूनिट लगभग 1.53 रुपये तक की राहत मिलेगी।
- शहरी व्यावसायिक उपभोक्ता: इनके लिए बिजली 1.20 रुपये प्रति यूनिट तक सस्ती होगी।
- ग्रामीण व्यावसायिक उपभोक्ता: इन्हें प्रति यूनिट 42 पैसे की राहत दी गई है।
बिजली कंपनियों ने विनियामक आयोग के समक्ष प्रति यूनिट 35 पैसे की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था, जिसे पूरी तरह से नामंजूर कर दिया गया। यह फैसला बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी जीत है।
अब पूरे राज्य में एक समान घरेलू दर
नियामक आयोग ने बिलिंग प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अब तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दो अलग-अलग स्लैब में बिलिंग होती थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब पूरे राज्य में सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक ही स्लैब लागू होगा। इस बदलाव से न केवल बिलिंग में होने वाली गड़बड़ियों पर अंकुश लगेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी अपना बिल समझना आसान हो जाएगा। कुल मिलाकर, इस निर्णय से बिहार में आम लोगों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां यहां क्लिक करें। यह कदम उपभोक्ता-हितैषी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।


