
बिहार भ्रष्टाचार: घोटालों की गर्दिश में चमकते सितारे भी अब अपनी चमक खोते दिख रहे हैं। बिहार की धरती पर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई इबारत लिखी जा रही है, जब आर्थिक अपराध इकाई ने दो वरिष्ठ अधिकारियों के साम्राज्य पर चोट की है।
बिहार भ्रष्टाचार: दो बड़े अफसरों पर EOU का शिकंजा, करोड़ों की बेनामी संपत्ति उजागर
बिहार भ्रष्टाचार: अफसरों पर EOU की बड़ी कार्रवाई
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग तेज हो गई है। राज्य की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने मंगलवार को सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करते हुए उनके 12 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। ईओयू से मिली जानकारी के अनुसार, किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार के पटना, पूर्णिया और किशनगंज स्थित छह ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया। गौतम कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी वैध आय से 60 प्रतिशत अधिक यानी 1.94 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है।
दूसरे अधिकारी सहरसा में डीआरडीए (जिला ग्रामीण विकास एजेंसी) के निदेशक वैभव कुमार हैं। उनके सहरसा और मुजफ्फरपुर के छह ठिकानों पर भी एक साथ छापेमारी की गई। वैभव कुमार पर आय से 78 प्रतिशत अधिक, कुल 2.41 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने का गंभीर आरोप है। यह पूरी कार्रवाई ईओयू के पुलिस अधीक्षक और वरीय डीएसपी स्तर के पदाधिकारियों के नेतृत्व में की गई, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
SDPO गौतम कुमार के ठिकानों पर EOU का छापा
किशनगंज में आय से अधिक संपत्ति मामले में आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने एसडीपीओ गौतम कुमार के धर्मगंज चौक स्थित सरकारी आवास पर मुख्य रूप से छापेमारी की। हालांकि, उनकी टीम अन्य कई ठिकानों पर भी दस्तावेज खंगाल रही थी। बताया जा रहा है कि टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य आय के ज्ञात स्रोतों और अर्जित संपत्ति के बीच के अंतर का आकलन करना है। यदि आय से अधिक संपत्ति का मामला पुख्ता तौर पर साबित होता है, तो गौतम कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में भूचाल सा आ गया है। विभागीय स्तर पर भी एसडीपीओ के सेवा रिकॉर्ड और पूर्व की पोस्टिंग से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
फिलहाल, छापेमारी की कार्रवाई अभी भी जारी है और आर्थिक अपराध इकाई की टीम सभी दस्तावेजों और संपत्तियों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही संपत्ति की वास्तविक कीमत और पूरे मामले का विस्तृत खुलासा हो पाएगा। जानकारी के मुताबिक, एसडीपीओ गौतम कुमार ने अपने 32 वर्षों की सेवा के दौरान इस अकूत संपत्ति को एकत्र किया है। छापेमारी की यह कार्रवाई पटना, पूर्णिया सहित सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों में चल रही है, जहाँ उनकी संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। गौरतलब है कि गौतम कुमार वर्ष 1994 बैच के दारोगा के रूप में पुलिस विभाग में शामिल हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग 1996 में किशनगंज में हुई थी। पदोन्नति पाकर वह डीएसपी बने और अपने लंबे कार्यकाल का अधिकतर समय उन्होंने सीमांचल के चार जिलों – किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में ही व्यतीत किया।
DRDA निदेशक वैभव कुमार पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप
मुजफ्फरपुर के मानियारी थाना के मिश्रा मानियारी निवासी और सहरसा में तैनात डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार के छह ठिकानों पर भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में ईओयू की टीम ने छापेमारी की। इनमें मिश्रा मानियारी स्थित उनका घर और मानियारी में एक आईटीआई कॉलेज भी शामिल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वैभव कुमार के पिता रिटायर्ड प्रोफेसर एलएन झा अंग्रेजी के विख्यात विद्वान हैं और उनकी अंग्रेजी ग्रामर की किताबें प्रकाशित होती हैं। आरोप है कि वैभव कुमार ने घूसखोरी के माध्यम से आय के ज्ञात स्रोतों से 2 करोड़ 41 लाख 14 हजार रुपये की अधिक संपत्ति अर्जित की है। ईओयू थाने में एक दिन पहले ही इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद कोर्ट से वारंट प्राप्त कर ईओयू की टीम ने सभी ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। मानियारी और सहरसा में छह ठिकानों पर जारी इस छापेमारी के दौरान मानियारी कॉलेज से अकूत अवैध संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात मिलने की बात सामने आ रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ यह छापेमारी भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहने का संकेत देती है।




