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फ़रवरी, 16, 2026
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Bihar Ethanol Policy: बिहार में इथेनॉल नीति पर घमासान, विधानसभा में गरजी सरकार और विपक्ष

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Bihar Ethanol Policy: बिहार विधानसभा में जब इथेनॉल फैक्ट्रियों पर बहस छिड़ी, तो लगा जैसे किसी ज्वलंत कढ़ाई में घी पड़ गया हो। मामला सिर्फ आंकड़ों का नहीं, राज्य की औद्योगिक दिशा, किसानों के पेट और युवाओं के भविष्य का है। केंद्र के खरीद कोटे और राज्य के उत्पादन लक्ष्य के बीच फंसी यह नीति बिहार के विकास की नई इबारत कैसे लिखेगी, यही सबसे बड़ा सवाल है।

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Bihar Ethanol Policy: बिहार में इथेनॉल नीति पर घमासान, विधानसभा में गरजी सरकार और विपक्ष

Bihar Ethanol Policy: विधानसभा में क्यों गरमाया इथेनॉल नीति का मुद्दा?

बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र एक बार फिर राज्य की औद्योगिक धुरी इथेनॉल फैक्ट्रियों को लेकर गर्मागर्म बहस का गवाह बना। सदन में उत्पादन क्षमता, केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए खरीद कोटे और उसके राज्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर तीखे सवाल उठाए गए। यह मुद्दा सिर्फ इथेनॉल के उत्पादन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बिहार की औद्योगिक नीति, किसानों की आय और प्रदेश के युवाओं के लिए उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों पर भी गहरा असर डाला है। विधायकों ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि केंद्र सरकार के खरीद कोटे और राज्य की महत्वाकांक्षी इथेनॉल नीति के बीच सामंजस्य कैसे बिठाया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस नीति का सीधा संबंध गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति और राज्य में नए उद्योगों के विस्तार से है।

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सदन में विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का खरीद कोटा बिहार की इथेनॉल उत्पादन क्षमता के मुकाबले बहुत कम है, जिससे न केवल फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से चल पाएंगी बल्कि किसानों को भी उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। इस स्थिति ने राज्य में निवेश करने वाले उद्यमियों के सामने भी एक अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि वे केंद्र के साथ लगातार संपर्क में हैं और कोटे में वृद्धि के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह नीति अंततः बिहार को औद्योगिक रूप से सशक्त बनाएगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाकर उनकी आय में वृद्धि करेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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किसानों की आय और युवाओं के भविष्य पर असर

इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी बहस ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए औद्योगिक विकास के रास्ते कितने चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। इस पूरी कवायद का लक्ष्य सिर्फ इथेनॉल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि एक स्थायी आर्थिक मॉडल स्थापित करना है जहां किसानों को अपनी फसल का उचित दाम मिले और स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर सृजित हों। यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है और क्या इथेनॉल नीति राज्य के आर्थिक मानचित्र पर एक नई पहचान बना पाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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