

Bihar Fake Doctors: स्वास्थ्य सेवा के नाम पर मौत का कारोबार, कब तक चलता रहेगा ये गोरखधंधा? बिहार में एक बार फिर झोलाछाप डॉक्टरों पर लगाम कसने की मांग जोर पकड़ रही है। यह महज एक बहस नहीं, बल्कि मासूम जिंदगियों से खिलवाड़ का वो कड़वा सच है, जो हर दिन सामने आता है। अब तो इस पर विधान परिषद में भी आवाज उठने लगी है।
बिहार फेक डॉक्टर्स पर फिर गरमाई सियासत: क्या मिलेगी फर्जी डिग्री वालों को सजा?
राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में फर्जी डॉक्टरों का जाल दशकों से फैला हुआ है। बिना किसी वैध डिग्री या विशेषज्ञता के ये कथित चिकित्सक मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करते रहते हैं। यह मुद्दा हाल ही में बिहार विधान परिषद में तब गरमाया जब परिषद सदस्य और स्वयं एक डॉक्टर, राज्यवर्धन सिंह आजाद ने स्वास्थ्य विभाग से सीधा सवाल किया। उन्होंने न केवल इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा किया।
बिहार फेक डॉक्टर्स पर विधान परिषद में उठा सवाल
डॉ. आजाद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बिहार में फर्जी डॉक्टरों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस पर अंकुश लगाने में सरकार विफल दिख रही है। उन्होंने पूछा कि स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे unqualified practitioners के खिलाफ अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं? इन झोलाछाप डॉक्टरों के कारण ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी भयावह है, जहाँ सही चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में लोग इन्हीं अयोग्य चिकित्सकों का सहारा लेने को मजबूर हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विधान परिषद में इस मुद्दे पर हुई तीखी बहस ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि फर्जीवाड़े में लिप्त डॉक्टरों पर उचित कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालत यह है कि सामान्य सर्दी-खांसी से लेकर गंभीर बीमारियों तक का इलाज ये बिना डिग्री वाले डॉक्टर करते हैं, जिससे कई बार मरीजों की जान तक चली जाती है।
स्वास्थ विभाग पर उठे सवाल
सवाल सिर्फ झोलाछाप डॉक्टरों का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और प्रवर्तन प्रणाली का भी है। कई सदस्यों ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसे फर्जी डॉक्टरों का कोई सटीक आंकड़ा नहीं है, जो इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा देता है। सरकार को इन अयोग्य चिकित्सकों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
इस गंभीर मुद्दे पर सरकार को जल्द ही कोई ठोस रणनीति बनानी होगी, ताकि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ रोका जा सके। परिषद में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जनता को भी इन फर्जी डॉक्टरों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
झोलाछाप डॉक्टरों का बढ़ता नेटवर्क
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी डॉक्टरों का यह नेटवर्क सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में भी इनके क्लिनिक और दवाखाने धड़ल्ले से चल रहे हैं। ये लोग अक्सर कम फीस में इलाज का लालच देकर मरीजों को फंसाते हैं। कई बार तो ये फर्जी डॉक्टर मरीजों को ऐसी दवाएं दे देते हैं, जिनका उन पर गंभीर दुष्प्रभाव होता है, जिससे उनकी हालत और बिगड़ जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एक सामाजिक और कानूनी समस्या है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह न केवल ऐसे चिकित्सकों की पहचान करे बल्कि उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित करे।
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने इस संबंध में परिषद को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही एक विशेष अभियान चलाकर ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर नकेल कसी जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, यह देखना होगा कि इन आश्वासनों का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




