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मार्च, 13, 2026
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Makhana Farming: जलकुंभी बनी वरदान, अब कचरे से होगी बंपर कमाई, किसानों की चमकी किस्मत

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Makhana Farming: जिस जलकुंभी को देखकर लोग नाक-भौं सिकोड़ते थे, आज वही बिहार के किसानों के लिए सोना उगल रही है। सहरसा जिले में एक ऐसा नवाचार हुआ है, जिसने खेती की पारंपरिक धारणाओं को पलटकर रख दिया है। यहां के किसान अब तालाबों पर बोझ समझी जाने वाली जलकुंभी से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार कर रहे हैं, जिससे मखाना की फसल लहलहा रही है।

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Makhana Farming में जलकुंभी खाद का कमाल

बिहार के सहरसा जिले की मुरादपुर पंचायत ने खेती में एक नई क्रांति की पटकथा लिखी है। यहां के किसान पहले जिस जलकुंभी को एक बड़ी समस्या मानकर तालाबों से निकालकर फेंक देते थे, अब उसी से वर्मीकम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद बना रहे हैं। यह प्रयोग विशेष रूप से मखाना की खेती के लिए वरदान साबित हो रहा है। पंचायत के वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट में पिछले एक साल से यह काम पूरी लगन से चल रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो महीनों के भीतर ही लगभग 500 किलोग्राम जैविक खाद का उत्पादन किया जा चुका है।

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इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इससे सीधे तौर पर स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। पंचायत के लगभग 15 परिवार, जिनमें महिलाओं की भूमिका अग्रणी है, इस काम से जुड़े हैं। वे न केवल खाद बनाने में मदद कर रही हैं, बल्कि इसका उपयोग अपने खेतों में भी कर रही हैं। इससे उनकी रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हुई है और उत्पादन लागत में भी भारी कमी आई है। इस अनूठे प्रयास से किसानों की आय में वृद्धि और जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।

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कैसे तैयार होती है यह चमत्कारी खाद?

जलकुंभी से वर्मीकम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल है। पंचायत के मुखिया राहुल झा ने बताया कि सबसे पहले तालाबों से जलकुंभी को बाहर निकाला जाता है। इसके बाद उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है ताकि वह जल्दी गल सके। कटे हुए टुकड़ों को गाय के गोबर के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस मिश्रण को एक समतल जगह पर रखकर लगभग 45 दिनों तक छांव में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है।

इस अवधि के दौरान मिश्रण में विशेष प्रकार के केंचुए छोड़े जाते हैं, जो इसे धीरे-धीरे खाकर वर्मीकम्पोस्ट में बदल देते हैं। यह खाद पोषक तत्वों का खजाना होती है। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम के साथ-साथ मैग्नीशियम, आयरन, जिंक और मैग्नीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह खाद न केवल मिट्टी की उर्वरता को कई गुना बढ़ा देती है, बल्कि मखाना के दानों की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। फिलहाल यह खाद पंचायत के किसानों को मुफ्त में दी जा रही है और भविष्य में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर बाजार में बेचने की भी योजना है।

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