Bihar Fasal Bima Yojana News: बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को लागू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, पूर्व में चली आ रही बिहार राज्य फसल सहायता योजना को अब बंद कर दिया गया है। यह अहम फैसला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।
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किसानों को अब मिलेगी फसल नुकसान की हर तरह से भरपाई
सोमवार को हुई कैबिनेट की इस बैठक में कुल 25 प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दी गई। कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि राज्य में रबी 2026-27 मौसम से केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को कार्यान्वित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल हानि से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है।
यह नई योजना राज्य में खरीफ 2018 के मौसम से लागू बिहार राज्य फसल सहायता योजना का स्थान लेगी। अपर मुख्य सचिव के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब बीमित किसानों को उनकी कृषि लागत के समतुल्य फसल क्षति का भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा, जिससे उन्हें बड़ी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। यह बदलाव किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस योजना की एक खास बात यह भी है कि बीमित भूमि की कोई अधिसीमा नहीं होगी। इसका मतलब है कि राज्य के बड़े जोत वाले किसानों को भी उनकी बीमित भूमि के समतुल्य फसल क्षति का पूरा लाभ मिल पाएगा, जिससे उन्हें पहले की तुलना में अधिक सुरक्षा मिलेगी। योजना इसी साल से प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लागू होने से किसानों को कई फायदे मिलेंगे। अब रकबे की सीमा समाप्त हो गई है, यानी किसान जितनी चाहें उतनी भूमि का फसल बीमा करा सकते हैं। यह योजना बुवाई से पहले से लेकर फसल कटाई के बाद तक हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करेगी, जिससे किसानों का कृषि जोखिम कम होगा।
किसानों को कुल प्रीमियम राशि में खरीफ के लिए डेढ़ प्रतिशत, रबी फसल के लिए दो प्रतिशत और फल-सब्जी के लिए पांच प्रतिशत राशि देनी होगी। किसानों द्वारा प्रीमियम राशि का भुगतान करने के बाद, केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर राशि बीमा कंपनियों को देगी। यह योजना किसानों के लिए अनिवार्य नहीं होगी, जो किसान बीमा कराना चाहेंगे, उन्हें ही प्रीमियम राशि का भुगतान करना होगा।
फसल क्षति का आकलन और उपज अनुमान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसमें सैटेलाइट इमेजिंग और ड्रोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है, जिससे क्षति का सटीक और पारदर्शी मूल्यांकन हो सकेगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से कृषि जोखिम को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद मिलेगी और किसानों को एक स्थायी आय सुनिश्चित होगी।
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भू-मापी शुल्क हुआ दोगुना
कैबिनेट ने भूमि मापी शुल्क में वृद्धि के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इस निर्णय के बाद अब भू-मापी के लिए किसानों और आम नागरिकों को दोगुना शुल्क चुकाना होगा। यह बढ़ी हुई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं, जिसका असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा।
नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में स्थित रैयती भूमि की मापी के लिए अब प्रति खेसरा दो हजार रुपये का शुल्क लिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा आठ हजार रुपये तय की गई है। पहले यह राशि क्रमशः न्यूनतम एक हजार रुपये और अधिकतम चार हजार रुपये थी। इस बढ़ोतरी से शहरी संपत्ति मालिकों पर सीधा वित्तीय भार पड़ेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी भूमि मापी शुल्क में वृद्धि की गई है। अब यहां प्रति खेसरा एक हजार रुपये और अधिकतम चार हजार रुपये का शुल्क लिया जाएगा। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम शुल्क 500 रुपये और अधिकतम शुल्क दो हजार रुपये था। यह बदलाव ग्रामीण इलाकों में भी भूमि से जुड़े कार्यों को महंगा कर देगा।
तत्काल मापी की आवश्यकता वाले मामलों के लिए भी विशेष शुल्क निर्धारित किया गया है। शहरी क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा चार हजार रुपये तथा अधिकतम 16 हजार रुपये का शुल्क तय किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह त्वरित सेवाओं के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी।
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इन दोनों बड़े फैसलों का बिहार की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। जहां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को सुरक्षा प्रदान करेगी, वहीं भू-मापी शुल्क में वृद्धि से संपत्ति संबंधी लेनदेन और कार्यों की लागत बढ़ जाएगी।







