

Bihar GI Tag: बिहार विधानसभा में इन दिनों स्वाद की विरासत को बचाने और उसे दुनिया के नक़्शे पर लाने की जद्दोजहद चल रही है, जहाँ स्थानीय व्यंजनों को पहचान दिलाने की मुहिम तेज हो गई है। बिहार के सदियों पुराने लज़ीज़ पकवानों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) दिलाने की मांग ने सदन में एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे राज्य के उन ख़ास फूड आइटम्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकती है, जिनकी खुशबू अब तक सिर्फ स्थानीय गलियारों तक सीमित थी।
इस बहस की शुरुआत तब हुई जब बाढ़ की प्रसिद्ध ‘खोबी की लाई’ को जीआई टैग दिलाने की मांग उठी। विधायक ने इस ख़ास व्यंजन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि बिहार की समृद्ध पाक परंपरा का एक प्रतीक है। इस मांग ने तुरंत सदन का ध्यान खींचा और चर्चा सिर्फ खोबी की लाई तक ही सीमित नहीं रही, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसके बाद बिहार के अन्य प्रतिष्ठित पारंपरिक फूड आइटम्स, जैसे गया का तिलकुट, बिहार के रसगुल्ले और अन्य स्थानीय मिठाइयों और नमकीनों को भी जीआई टैग दिलवाने की बात होने लगी। विधायकों ने जोर दिया कि इन उत्पादों को जीआई टैग मिलने से न केवल उनके उत्पादकों को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत होगी।
Bihar GI Tag: क्या है खोबी की लाई और तिलकुट का मामला?
खोबी की लाई, जो बाढ़ क्षेत्र की एक अनूठी मिठाई है, अपने स्वाद और बनाने के पारंपरिक तरीके के लिए जानी जाती है। इसी तरह, गया का तिलकुट, जिसे मकर संक्रांति पर विशेष रूप से बनाया और खाया जाता है, अब पूरे देश में अपनी पहचान बना चुका है। इन दोनों ही उत्पादों की अपनी एक विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है, जो इन्हें जीआई टैग के लिए एक मज़बूत दावेदार बनाती है। बिहार का पारंपरिक व्यंजन सिर्फ पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और विरासत का वाहक है।
सरकार ने इस मामले पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इन सभी पारंपरिक फूड आइटम्स की गुणवत्ता और विशिष्टता की जांच के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। 25 फरवरी को वसंत उत्सव प्रदर्शनी में इन स्थानीय व्यंजनों का प्रदर्शन और उनकी टेस्टिंग होगी। इस आयोजन के बाद जीआई टैग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। यह पहल बिहार के छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए भी एक बड़ा अवसर लेकर आएगी, जिससे उन्हें अपने उत्पादों को एक बड़ा बाज़ार मिलेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह सिर्फ जीआई टैग की बात नहीं है, बल्कि बिहार की अनमोल पाक विरासत को संरक्षित करने और उसे अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक प्रयास भी है। यह कदम राज्य के पर्यटन को भी बढ़ावा देगा, क्योंकि पर्यटक इन विशिष्ट व्यंजनों का स्वाद लेने बिहार आएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वसंत उत्सव में होगा व्यंजनों का प्रदर्शन और टेस्टिंग
आने वाले वसंत उत्सव में इन सभी पारंपरिक फूड आइटम्स का प्रदर्शन न केवल उनकी खासियत को उजागर करेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी इन विशिष्ट उत्पादों के बारे में जानने का मौका मिलेगा। इस दौरान विशेषज्ञ टीमें इन व्यंजनों की गुणवत्ता, प्रामाणिकता और भौगोलिक विशिष्टता की गहन जांच करेंगी। इन रिपोर्ट्स के आधार पर ही जीआई टैग के लिए अंतिम आवेदन तैयार किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि बिहार अपनी सांस्कृतिक धरोहरों और अपने स्वाद की पहचान को लेकर गंभीर है। यह पहल बिहार के खाद्य उद्योग को एक नई दिशा देगी और ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान को भी मजबूत करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


