

Farmer ID: सरकारी दफ्तरों के चक्कर और बिचौलियों के मकड़जाल से अब अन्नदाता को मुक्ति मिलने वाली है। बिहार सरकार ने डिजिटल खेती की दिशा में ऐसा कदम बढ़ाया है, जिससे योजनाओं का पैसा सीधे किसानों की जेब में पहुंचेगा और उनकी तकदीर बदल जाएगी।
Farmer ID नहीं तो लाभ नहीं? कृषि मंत्री ने दूर किया भ्रम
पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने यह स्पष्ट किया कि जब तक राज्य के सभी किसानों का फार्मर आईडी नहीं बन जाता, तब तक किसी भी किसान को योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिहार में कुल 85.53 लाख पीएम किसान लाभार्थी हैं, जिनमें से 45.18 लाख किसानों का फार्मर आईडी बनाने का काम पूरा हो चुका है। जिनके पास यह आईडी होगी, उन्हें त्वरित किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन मिलने में आसानी होगी। शेष किसानों को भी जल्द ही इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करेगी, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी किसान का हक नहीं मारा जाएगा। यह कदम डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/।
बिचौलियों पर लगेगी लगाम, डिजिटल होगी खेती
सरकार का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र से बिचौलियों का वर्चस्व समाप्त करना है ताकि योजनाओं का सीधा लाभ अन्नदाताओं तक पहुंच सके। मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा, “हमारा प्रयास छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना और उनके जोखिम को कम करना है।” उन्होंने आगे कहा कि कृषि उद्यमी, वैज्ञानिक और स्टार्टअप से जुड़े लोगों के साथ मिलकर कृषि का समग्र विकास किया जाएगा। फसल प्रोसेसिंग और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर हमारा विशेष जोर है, जिससे न केवल बेरोजगारी दूर होगी, बल्कि किसानों के जीवन में समृद्धि भी आएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार धान-गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के अलावा अधिक मूल्य वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके लिए फसलों की मार्केटिंग की भी उचित व्यवस्था की जा रही है।
उत्पादन से लेकर बाजार तक, हर स्तर पर हो रहा सुधार
कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने पिछले 20 वर्षों में धान, गेहूं और मक्का के उत्पादन में हुई वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब विभाग का ध्यान दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है। उन्होंने राज्य में उर्वरकों की किसी भी कमी से इनकार किया और कहा कि शिकायतों पर विभाग तुरंत कार्रवाई कर रहा है। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक मशीनें भी अनुदान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
वहीं, उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार ने बताया कि छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और कोल्ड चेन जैसी व्यवस्थाओं का विकास किया जा रहा है। कृषि विभाग में विपणन निदेशक शैलेन्द्र कुमार ने जानकारी दी कि राज्य के 54 में से 22 कृषि बाजारों को अपग्रेड कर दिया गया है और आने वाले समय में ग्रामीण हाटों को भी विकसित करने की योजना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


