Bihar Education Reform: शिक्षा का मंदिर अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार के सरकारी स्कूल अब ज्ञान के साथ-साथ आत्मरक्षा और कला का भी नया अध्याय लिखेंगे। यह सिर्फ एक बदलाव नहीं, एक क्रांति है जो प्रदेश के भविष्य को नया आकार देगी।
बिहार एजुकेशन रिफॉर्म: सरकारी स्कूलों में बेटियां सीखेंगी मार्शल आर्ट, गूंजेगा संगीत
बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है। शिक्षा विभाग की नई पहल के तहत, अब यहां की बेटियां न केवल अकादमिक ज्ञान प्राप्त करेंगी, बल्कि आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट के दांव-पेच सीखकर अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करेंगी। यह कदम छात्राओं में आत्मविश्वास भरने और उन्हें हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, छात्राओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित ‘मास्टर ट्रेनर’ द्वारा कराटे जैसे मार्शल आर्ट सिखाए जाएंगे। इसका उद्देश्य है कि स्कूल के समय के भीतर ही वे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कौशल सीख सकें, जिससे उन्हें बाहरी खतरों से निपटने में मदद मिलेगी। यह पहल न केवल शारीरिक मजबूती देगी बल्कि मानसिक दृढ़ता और अनुशासन भी सिखाएगी। इस प्रकार यह छात्र सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बिहार एजुकेशन रिफॉर्म: छात्राओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण
सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में, चयनित स्कूलों में मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे चलकर अन्य शिक्षकों और छात्रों को प्रशिक्षण देंगे। इसका लक्ष्य हर सरकारी स्कूल में कम से कम एक प्रशिक्षित शिक्षक की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जो मार्शल आर्ट का ज्ञान प्रदान कर सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करेगा कि हर बेटी आत्मनिर्भर बन सके।
यह पहल केवल शारीरिक प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव छात्राओं के समग्र व्यक्तित्व विकास पर पड़ेगा। उन्हें यह महसूस होगा कि वे किसी भी परिस्थिति का सामना करने में सक्षम हैं, जिससे उनकी आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक होंगी।
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स्कूलों में बजेगी संगीत की धुन
आत्मरक्षा प्रशिक्षण के साथ-साथ, बिहार के सरकारी स्कूलों में संगीत शिक्षा को भी एक नया आयाम दिया जा रहा है। अब बच्चे रिकॉर्डेड गानों पर सिर्फ झूमने के बजाय, खुद वाद्य यंत्रों की थाप पर संगीत सीखेंगे। यह पहल बच्चों में कलात्मक प्रतिभा को निखारने और उन्हें संगीत की गहरी समझ विकसित करने में मदद करेगी।
स्कूलों में अब हारमोनियम, तबला, ढोलक और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रशिक्षित संगीत शिक्षक बच्चों को इन वाद्य यंत्रों को बजाना सिखाएंगे, जिससे वे भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत की समृद्ध परंपरा से जुड़ सकेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ेगा और रचनात्मकता को बढ़ावा देगा।
यह दोहरी पहल – मार्शल आर्ट और संगीत शिक्षा – बिहार के सरकारी स्कूलों को शिक्षा के ऐसे केंद्र में बदल देगी, जहां छात्र केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन कौशल और कलात्मकता भी सीखेंगे। यह प्रदेश के युवा पीढ़ी के समग्र विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और एक सफल जीवन जीने के लिए तैयार करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






