

Bihar Government Salary: बिहार की अर्थव्यवस्था में सरकारी खर्चे का पैमाना किसी थर्मामीटर से कम नहीं। पिछले दो दशकों में यह थर्मामीटर जिस गति से चढ़ा है, वह राज्य के वित्तीय प्रबंधन की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है। वेतन और पेंशन पर होने वाला खर्च अब एक विशालकाय वटवृक्ष की तरह फैल चुका है।
Bihar Government Salary: दो दशकों में 13 गुना बढ़ा खर्च, जानें कहां जा रहा राज्य का खजाना!
Bihar Government Salary: वेतन और पेंशन की बढ़ती चुनौती
बिहार में सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर होने वाला खर्च पिछले बीस वर्षों में चौंकाने वाले रूप से 13 गुना से भी अधिक बढ़ गया है। वर्ष 2005-06 में यह आंकड़ा महज 5,152 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 70,220 करोड़ रुपये के भयावह स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि केवल वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि राजकीय कर्मियों की संख्या और पेंशन पर होने वाले व्यय में भी भारी इजाफा दर्ज किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह आंकड़ा राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत करता है। जहां एक ओर नई नियुक्तियों और कर्मचारियों की आवश्यकताओं को पूरा करना आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर इन बढ़ते खर्चों का बोझ राज्य के विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।
वित्तीय बोझ और विकासात्मक आयाम
राज्य सरकार के बजट का एक बड़ा हिस्सा अब कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर ही केंद्रित हो गया है। इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं, जिनमें विभिन्न विभागों में नई भर्तियां, वेतनमान में संशोधन और सेवानिवृत्त कर्मियों की बढ़ती संख्या शामिल है। इन खर्चों का सीधा असर अन्य विकासात्मक परियोजनाओं, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उपलब्ध धन पर पड़ सकता है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कर्मचारियों की संख्या में उछाल
बीते दो दशकों में राज्य में राजकीय कर्मियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेषकर शिक्षक, पुलिस और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गई हैं, जिसका सीधा प्रभाव वेतन मद में बढ़ोतरी के रूप में देखा जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके साथ ही, पेंशनभोगियों की बढ़ती संख्या भी सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। यह स्थिति भविष्य के लिए एक दीर्घकालिक वित्तीय रणनीति की मांग करती है, ताकि राज्य का विकास बाधित न हो और वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रित करने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार को न केवल खर्चों का प्रबंधन करना होगा, बल्कि राजस्व के स्रोतों को भी बढ़ाना होगा। अन्यथा, बढ़ती देनदारियां राज्य के आर्थिक प्रगति की राह में बाधा बन सकती हैं।




