Bihar Airport News: बिहार के विकास को नई उड़ान देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। सोनपुर और बिहार के भागलपुर स्थित अजगैबीनाथ धाम में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने सलाहकार चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन नए हवाई अड्डों के निर्माण से राज्य में हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
चयनित सलाहकार जमीन से जुड़े सभी आवश्यक कार्यों में विभाग की मदद करेंगे। इनमें जमीन की पैमाइश, मालिकाना हक की जांच, सीधे जमीन खरीदने में सहयोग, रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और डिजिटल लैंड बैंक में जमीन का रिकॉर्ड दर्ज कराने जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। यह प्रक्रिया एयरपोर्ट निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण को सुगम बनाएगी।
जमीन की पैमाइश और कानूनी जांच
एयरपोर्ट के लिए चिह्नित जमीन का संयुक्त माप सर्वेक्षण किया जाएगा। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य जमीन की सही-सही माप करना है, जिससे उसकी सीमा और कुल क्षेत्रफल का सटीक पता चल सके। इसके साथ ही, जमीन के मालिकाना हक और उससे जुड़े सभी कानूनी कागजातों की गहन जांच भी होगी। इसका मकसद दस्तावेजों को पूरी तरह से परखना और भविष्य में स्वामित्व को लेकर किसी भी तरह के विवाद या अड़चन से बचना है।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में मिलेगा सहयोग
दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण या सीधे जमीन खरीदने की पूरी प्रक्रिया में सलाहकार महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे। वे जमीन मालिकों और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ सभी आवश्यक प्रशासनिक कार्यों में भी मदद देंगे। जमीन खरीद से जुड़े कार्यों को आसान बनाने के लिए कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सहायता देना भी सलाहकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक होगा।
रजिस्ट्री से लेकर डिजिटल रिकॉर्ड तक का काम
सलाहकार जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार करने और उनकी रजिस्ट्री कराने में भी सहायता करेंगे। इसके बाद, राजस्व रिकॉर्ड में दाखिल-खारिज से जुड़े सभी काम पूरे कराए जाएंगे। एयरपोर्ट परियोजना के लिए ली जाने वाली जमीनों को डिजिटल लैंड बैंक में दर्ज कराने का काम भी सलाहकार ही संभालेंगे। इसमें कागजी दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का कार्य भी शामिल है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
नागरिक उड्डयन विभाग ने सलाहकार के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 12 नवंबर तय की है। पहले यह तारीख 22 अक्टूबर थी, जिसे बढ़ाकर इच्छुक आवेदकों को आवेदन जमा करने के लिए अधिक समय दिया गया है। इस विस्तार से योग्य सलाहकारों को प्रक्रिया में शामिल होने का बेहतर अवसर मिलेगा, जिससे परियोजना को गति मिल सकेगी।







