

Bihar Illegal Moneylending Law: अंधेरे में डूबे कर्जदारों के जीवन में अब उम्मीद की एक नई किरण जगी है। शोषकों के जाल में फंसे लोगों को सूदखोरों के चंगुल से निकालने के लिए, बिहार विधानसभा ने एक ऐतिहासिक विधेयक पारित कर सूदखोरी, मनमानी ब्याज दरों और उत्पीड़नकारी वसूली पर कड़ा शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है, जिससे हजारों कर्जदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस नए कानून का उद्देश्य राज्य में अवैध सूदखोरी और उसके कारण उत्पन्न होने वाले शोषण को रोकना है। सरकार ने यह कदम उन अनगिनत लोगों की दुर्दशा को देखते हुए उठाया है, जो ऊंची ब्याज दरों और दबंगई से वसूली के शिकार थे। यह विधेयक एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करेगा, जो कर्जदारों के हितों की रक्षा करेगा और सूदखोरों पर नकेल कसेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Bihar Illegal Moneylending Law: क्या है नए विधेयक में खास?
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, अब कोई भी व्यक्ति सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम ब्याज दर से अधिक नहीं वसूल पाएगा। मनमानी ब्याज दरें लगाने और उसके लिए उत्पीड़न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कानून उन गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए एक वरदान साबित होगा, जिन्हें अक्सर कर्ज के बोझ तले दबना पड़ता था।
इस कानून के तहत, अवैध वसूली या सूदखोरी में लिप्त पाए जाने पर 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माना का प्रावधान है। साथ ही, हर जिले में विशेष न्यायालयों का गठन किया जाएगा, जो इन मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करेंगे। यह कदम निश्चित रूप से सूदखोरों के हौसलों को पस्त करेगा और समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाएगा।
इस पहल से उन छोटे दुकानदारों, किसानों और दैनिक मजदूरों को विशेष रूप से लाभ मिलेगा, जो अक्सर अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज लेने पर मजबूर होते हैं और फिर शोषण का शिकार बनते हैं। सरकार की यह दूरदर्शिता एक बड़े वर्ग के लिए कर्जदारों को राहत प्रदान करेगी और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी।
कर्जदारों को मिलेगी सुरक्षा, सूदखोरों पर शिकंजा
बिहार सरकार का यह कदम राज्य में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून सिर्फ सूदखोरों को ही नहीं रोकेगा बल्कि एक सुरक्षित वित्तीय वातावरण भी बनाएगा जहां आम नागरिक बिना डर के अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
इस विधेयक के लागू होने के बाद उम्मीद है कि बिहार में माइक्रोफाइनेंस विनियमन भी अधिक प्रभावी होगा, जिससे वैध वित्तीय संस्थाएं भी अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह बनेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कानून राज्य के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


